राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी कांग्रेस की मुश्किलें?- जून में मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। जिसमें दो सीटें भाजपा के डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन की हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही एलान कर चुके है कि वह अब राज्यसभा नहीं जाएंगे। ऐसे में अब इस सीट पर कांग्रेस की तरफ से नया नाम आना तय है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस विधायक को लेकर अदालत के फैसलों ने सियासी समीकरणों को उलझा कर रख दिया है।
दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक एफडी फर्जीवाड़े मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो चुकी है। वहीं इससे पहले विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता को हाईकोर्ट ने खत्म कर दी है। हलांकि मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता शून्य होने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया है लेकिन अदालत ने उन्हें विधानसभा सदस्य के रूप में किसी भी चुनाव में मतदान करने से रोक दिया है।
वहीं तीसरा मामला बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का है, जिनकी विधायकी खत्म कराने को लेकर कांग्रेस अब जबलपुर हाईकोर्ट में पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाईकोर्ट याचिका दायर कर मांग की है कि निर्मला सप्रे ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है, इसलिए संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल कानूनः के तहत उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। एक और कांग्रेस निर्मला सप्रे को भाजपा में बता रही है लेकिन खुद निर्मला सप्रे ने कोर्ट में हलफनामा दिया है कि वह कांग्रेस में है। हाईकोर्ट में निर्मला सप्रे के इस दांव से पूरे मामले में नया मोड आ गया है क्यों निर्मला सप्रे लंबे समय से भाजपा के मंचों पर नजर आती है। इतना ही नहीं वह प्रदेश भाजपा कार्यालय में संगठन के कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ भाजपा विधायक दल की बैठक में भी नजर आ चुकी है। ऐसे में निर्मला सप्रे पर कांग्रेस कोई भरोसा नहीं कर सकती है।
कांग्रेस के इन विधायकों को लेकर उठे संशय ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है। क्रॉस वोटिंग के डर और अंदरूनी असंतोष ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों जिस तरह विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने अपने पद से इस्तीफा दिया, वह पार्टी की गुटबाजी की ओर साफ इशारा करता है।
कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के दावेदार- राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से दावेदारों में कई दिग्गजों के नाम है। इसमें पीससी चीफ जीतू पटवारी के साथ पूर्व मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और मीनाक्षी नटराजन मुख्य रूप से है। हलांकि कांग्रेस की ओस से अभी नेता खुलकर दावेदारी नहीं कर रहे है। वहीं कांग्रेस को चुनाव में एक बार फिर हॉस ट्रेडिंग का खतरा मंडरा रहा है।
राज्यसभा चुनाव में सीटों का सियासी गणित- मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें है। राज्यसभा चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के वोटर चाहिए। वर्तमान में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 62 है जो जरूरी सीटों से सिर्फ 4 वोट ज्यादा हैं, ऐसे में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का भी डर सता रहा है। वहीं, भाजपा की पास अभी 164 विधायक हैं। भाजपा के पास दो सीट के लिए जरूरी 116 वोट हैं, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसके पास 47 ही वोट हैं। ऐसे में तीसरी सीट को लेकर एक बार फिर सियासी दांव पेंच देखने को मिल सकते है, जैसा 2020 के राज्यसभा चुनाव में हुआ था।