सीजफायर का फायदा उठा रही हैं भारतीय कंपनियां, एक्सपोर्ट में किया तगड़ा इजाफा
TV9 Bharatvarsh April 10, 2026 02:43 PM

भारतीय कंपनियां ईरान युद्ध में हुए सीजफायर का फायदा उठाने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है. इसके तहत कंपनियां निर्यात फिर से शुरू कर रही हैं और इस क्षेत्र में फैक्ट्रियों की पूरी क्षमता से काम दोबारा शुरू कर रही हैं. युद्ध से प्रभावित देशों में दोबारा रीबिल्डिंग की उम्मीद के चलते कंपनियां ऑर्डर बढ़ने की तैयारी भी कर रही हैं. फार्मा कंपनियों ने निर्यात की मांग में तेजी आने की बात कही है, क्योंकि देश दवाओं का अपना स्टॉक फिर से भरना चाह रहे हैं. वहीं, पैकेट वाला खाना बनाने वाली कंपनियों ने कहा है कि सप्लाई अब सामान्य हो रही है.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर कंडीशनर, फ्रिज, तार और केबल जैसे बिजली के सामान बनाने वाली कंपनियां भी ज्यादा ऑर्डर के लिए तैयारी कर रही हैं. मध्य-पूर्व में पिछले महीने से चल रहे युद्ध से कारोबार में 40-50% की गिरावट आई थी. Havells India के मुख्य कार्यकारी अनिल राय गुप्ता ने कहा कि मध्य-पूर्व में दोबारा निर्माण की मांग में भारत एक बड़ा हिस्सा हासिल कर सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र के साथ उसके मजबूत संबंध हैं और वह भौगोलिक रूप से भी काफी करीब है.” कंपनी अपने निर्यात से होने वाली कमाई का लगभग 40% इसी क्षेत्र से कमाती है और उसे केबल और तारों के क्षेत्र में काफी अवसर नजर आ रहे हैं.

कितना बढ़ेगा वॉल्यूम

भारत की सबसे बड़ी रोजमर्रा के जरूरी सामान बनाने वाली कंपनी, AWL Agri Business दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर फिर से माल भेजना शुरू करेगी, जिससे पूरे क्षेत्र में सप्लाई चेन फिर से सामान्य हो जाएगी. ईटी की रिपोर्ट में कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष अंग्शु मलिक ने कहा कि डिस्ट्रीब्यूटर जरूरी सामान की सप्लाई बनाए रखने के लिए ज्यादा खर्च उठाने को भी तैयार हैं. उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि माल की वॉल्यूम फिर से बढ़कर 4,000-5,000 टन प्रति माह तक पहुंच जाएगी. युद्ध के दौरान, कंपनी ओमान के रास्ते माल भेज रही थी.

बुधवार को घोषित दो हफ्ते के सीजफायर से युद्ध तो रुक गया है, लेकिन इस क्षेत्र में तनाव अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है. इसी वजह से बड़ी शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को अहम जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से भेजने से पहले अभी इंतजार की स्थिति में हैं. जिन कंपनियों के इस क्षेत्र में स्थानीय प्लांट हैं, जैसे Parle Products और Dabur India, वे भी अब अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर रही हैं. Parle Products के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने बताया कि बहरीन में स्थित उनका प्लांट, जो पिछले महीने 70-80% क्षमता पर काम कर रहा था, अब अपनी पूरी क्षमता से काम करना शुरू कर देगा. वहीं, AC बनाने वाली कंपनी Blue Star भी दोबारा निर्माण से जुड़ी बढ़ी हुई मांग को पूरा करने की तैयारी कर रही है.

SMEs को हो रहा फायदा

SMEs समेत सभी निर्यातकों ने शिपिंग के रास्ते फिर से खुलने के बाद अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ फिर से काम करना शुरू कर दिया है. जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से लॉजिस्टिक्स में आसानी होने की उम्मीद है और माल ढुलाई व बीमा की लागतें जो पहले 40-50% तक बढ़ गई थीं अब वह कम होने लगी हैं. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा कि युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने से निर्यातकों को बहुत जरूरी राहत मिली है. इससे लॉजिस्टिक्स की रुकावटें दूर करने, माल ढुलाई की दरें कम करने और बीमा की लागतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलेगी. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि इससे निकट भविष्य में व्यापार में सुधार हो सकता है, लेकिन इस युद्धविराम के अस्थायी होने को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है.

समुद्री जहाजों से माल ढुलाई की दरों में लगातार बढ़ोतरी के बाद, गुरुवार को ड्रूरी का वर्ल्ड कंटेनर इंडेक्स (WCI) 21.59% बढ़कर $2,309 प्रति 40 फुट कंटेनर पर पहुंच गया. 26 फरवरी को यह $1,899 पर था. पिछले हफ्ते की तुलना में, यह इंडेक्स 2 अप्रैल के $2,287 के स्तर से थोड़ा बढ़ा है. सहाय ने बताया कि कुछ खरीदारों ने माल की डिलीवरी लेने के लिए तैयार होने की बात कही है और माल भेजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने को कहा है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्धविराम की अवधि बढ़ाई जाती है, तो इससे नई मांग भी पैदा हो सकती है.

यह भी पढ़ें- एक दिन में ही विदेशों से आने वाला पैसा हो जाएगा क्रेडिट, RBI ने किया नियमों में बड़ा बदलाव

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.