बिना बताए ड्यूटी से गायब! फिर भी पेंशन चाहता था SBI कर्मचारी, सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी क्लास
एबीपी लाइव डेस्क April 12, 2026 10:12 AM

SC Denies Pension to SBI Employee: स्वैच्छिक सेवानिवृति यानी VRS को लेकर एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SBI के एक पूर्व कर्मचारी की पेंशन याचिका को खारिच कर दिया है. कार्ट ने कहा कि सिर्फ 20 साल तक नौकरी करना ही काफ नहीं है. इसके साथ नियमों के मुताबिक बाकी शर्तें पूरी करना भी बेहद जरूरी होता है. 

दरअसल, संबंधित कर्मचारी ने लगभग 20 साल से ज्यादा सेवा करने के बाद नौकरी छोड़ दी थी और बाद में उसने पेंशन की मांग की, जिसके बाद कार्ट ने पाया कि यह पूरा मामला स्वैच्छिक सेवानिवृति VRS का नहीं, बल्कि सैवच्छिक नौकरी छोड़ने का है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस N.V. अंजारिया की बेंच ने यह माना कि सेवानिवृत्ति लाभ तभी दिया जा सकता है जब कर्मचारी नियमों के अनुसार इसके लिए पात्र हो. लागू नियमों के आधार पर बेंच ने कहा कि दो शर्तें जिनका पूरा होना ज़रूरी है.

जानिए क्या था मामला?

कर्मचारी ने 1978 में SBI में क्लर्क के तौर पर नौकरी जॉइन की थी और 1979 में उसकी नौकरी पक्की हो गई. 1989 में उसके करियर में एक अप्रत्याशित मोड़ आया, जब उसने कथित तौर पर विदेश में नौकरी करने के लिए नौकरी छोड़ दी. प्रतिवादी (SBI) के मुताबिक, कर्मचारी 21 जनवरी, 1998 से 11 दिसंबर, 1998 के बीच बिना अनुमति के अनुपस्थित रहने लगा. उसकी बिना अनुमति के अनुपस्थिति के संबंध में बैंक ने 6 जून, 1998 और 12 नवंबर, 1998 को नोटिस जारी किए, जिसमें कर्मचारी से काम पर लौटने और अपनी अनुपस्थिति का कारण बताने के लिए कहा गया.

कर्मचारी की ओर से कोई जवाब न मिलने पर बैंक ने यह घोषणा कर दी कि उसने 12 दिसंबर, 1998 से अपनी सेवाएं स्वेच्छा से छोड़ दी हैं. वकील ने आगे यह तर्क दिया कि यह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का मामला नहीं है, बल्कि स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का मामला है, क्योंकि कर्मचारी विदेश में कार्यरत था और वहीं रह रहा था. बाद में 2004 में कर्मचारी ने दोबारा नौकरी में आने की कोशिश की, लेकिन इस बार बैंक ने साफ मना कर दिया.

जुलाई 2008 में बैंक ने इस अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कर्मचारी ने स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति ले ली थी. कर्मचारी के वकील ने यह तर्क दिया कि उसने (कर्मचारी ने) 20 साल से ज्यादा की सेवा पूरी कर ली थी (ठीक 20 साल, 3 महीने और 25 दिन की सेवा) और इसलिए वह SBI कर्मचारी पेंशन फंड नियमों के नियम 22(i)(c) के तहत पेंशन का हकदार है. दूसरी ओर SBI के वकील (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल - ASG) ने दलील दी कि अपीलकर्ता की पेंशन योग्य सेवा, पात्रता मानदंडों से कम है. इसके अलावा नौकरी छोड़ते समय उसकी उम्र 50 साल पूरी नहीं हुई थी, जिससे वह नियम 22(i)(a) के तहत पेंशन लाभों के लिए अयोग्य हो जाता है.

आगे कार्ट ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कहा कि पेंशन पाने के लिए दो जरूरी शर्तें हैं

  • कम से कम 20 साल की नौकरी.
  • नौकरी छोड़ते समय 50 साल की उम्र.

इसी आधार पर कर्मचारी की याचिका खारिज की

जांच में सामने आया कि कर्मचारी की वास्तविक सेवा 20 साल से कम है लगभग 19 साल 9 महीने थी और साथ ही उसकी उम्र भी 50 साल से कम थी. साथ ही कार्ट ने यह भी साफ किया कि यह VRS का मामला नहीं था. कर्मचारी को कोई VRS ने दी गई थी, बल्कि उसने बिना किसी सूचना के नौकरी छोड़ी थी, जिसके लिए VRS के तहत मिलने वाले लाभ भी नहीं मिल सकते. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि नियमों को पूरा किए बिना पेंशन का दावा नहीं किया जा सकता. इसी आधार पर कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी गई.

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