कैसे एक भारतीय छात्र ने
Generative AI से कमाए करोड़ों?
आज के डिजिटल युग में हम जो देखते हैं, क्या वह सच है? अगर मैं आपसे कहूं कि एक 22 साल का भारतीय मेडिकल छात्र, उत्तर भारत के अपने कमरे में बैठकर एक ऐसी "अमेरिकी महिला" चला रहा था, जिसे लाखों लोग न सिर्फ़ फॉलो कर रहे थे, बल्कि उस पर अंधाधुंध पैसा भी लुटा रहे थे?
यह कहानी है सैम (बदला हुआ नाम) की, जिसने Generative AI को अपना हथियार बनाया और तकनीक व राजनीति के उस 'Dark Intersection' को उजागर किया, जिसे देखकर आज दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स हैरान हैं।
Medical Degree की फीस के लिए 'Emily Hart' का जन्म
सैम का सपना एक ऑर्थोपेडिक सर्जन बनना और अमेरिका जाकर प्रैक्टिस करना था। लेकिन इसके लिए लगने वाली भारी-भरकम फीस और लाइसेंसिंग परीक्षाओं का खर्च उठाना उसके बस की बात नहीं थी। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा प्रयोग जिसने Wired की पत्रकार एज डिक्सन तक को अपनी रिपोर्ट लिखने पर मजबूर कर दिया।
सैम ने AI टूल्स का इस्तेमाल करके 'Emily Hart' नाम का एक अवतार बनाया। एमिली एक गोरी, सुंदर और रूढ़िवादी (Conservative) अमेरिकी महिला थी। इंस्टाग्राम पर उसे एक ऐसी 'नर्स' के रूप में पेश किया गया जो डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक (MAGA - Make America Great Again) है, बंदूकें रखने की शौकीन है और ईसाई धर्म का प्रचार करती है।

Google Gemini का 'Cheat Code' और टारगेट ऑडियंस
सैम ने शुरू में सामान्य कंटेंट डाला, लेकिन सफलता नहीं मिली। उसने Google Gemini AI से सलाह ली (हालांकि गूगल इस बात से इनकार करता है)। सैम के अनुसार, जेमिनी ने उसे सुझाव दिया कि :
'Hot Girl' मार्केट में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा है।
उसे एक
'Niche' चुननी चाहिए।
MAGA/Conservative ग्रुप एक 'Cheat Code' की तरह है क्योंकि यहां पुरुष अधिक वफादार होते हैं और उनके पास खर्च करने के लिए पैसा भी होता है।
सैम ने एमिली के जरिए प्रो-लाइफ (Pro-life), एंटी-एबॉर्शन और एंटी-इमिग्रेशन जैसे भड़काऊ कैप्शन लिखना शुरू किए। नतीजा? उसकी हर रील पर 30 लाख से 1 करोड़ तक व्यूज़ आने लगे।
Grok AI और Fanvue: अश्लीलता और राजनीति का व्यापार :
जब एमिली के हजारों फॉलोअर्स हो गए, तो सैम ने अपनी कमाई के तरीके बदले। उसने एलन मस्क के Grok AI का इस्तेमाल करके एमिली की न्यूड और आपत्तिजनक तस्वीरें बनाईं और उन्हें 'Fanvue' जैसे प्लेटफॉर्म पर बेचा। इसके अलावा, उसने ट्रंप समर्थक नारों वाली टी-शर्ट्स भी बेचीं।
चौंकाने वाला आंकड़ा: सैम दिन में सिर्फ़ 30 से 50 मिनट काम करता था और महीने के हजारों डॉलर (लाखों रुपए) कमा रहा था— जो भारत में एक स्थापित डॉक्टर की सैलरी से भी कहीं अधिक है।
क्या
AI अब इंसानों से ज्यादा असली है?
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की फेलो वैलेरी विर्टशाफ्टर का मानना है कि एआई अब इन फर्जी प्रोफाइल्स को इतना रियलिस्टिक बना चुका है कि इन्हें पहचानना लगभग असंभव है। मेटा (Facebook/Instagram) एआई कंटेंट पर लेबल लगाने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन सैम जैसे स्मार्ट यूज़र्स इन नियमों को आसानी से चकमा दे रहे हैं।
Expert Advice: AI फ्रॉड से कैसे बचें?
Reverse Image Search: किसी भी संदेहास्पद प्रोफाइल की फोटो को गूगल पर सर्च करें।
Check the Hands: अक्सर AI फोटो में हाथों की उंगलियां या शरीर के जोड़ थोड़े अजीब दिखते हैं।
Consistency Check: देखें कि क्या वह व्यक्ति कभी लाइव आता है या वीडियो कॉल पर बात करता है? AI अक्सर स्टिल फोटोज और छोटी रील्स में ही सीमित रहता है।
सैम का तर्क: "मैंने ठगा नहीं
, डिमांड पूरी की"
फरवरी में सैम का अकाउंट 'धोखाधड़ी' के चलते बैन कर दिया गया, लेकिन उसे कोई पछतावा नहीं है। उसका कहना है, "मैंने किसी को मजबूर नहीं किया। लोग जो देखना चाहते थे, मैंने वही दिखाया। अगर वे 'महामूर्ख' (Mega-fools) हैं, तो इसमें मेरा क्या दोष?"
यह मामला एक बड़े खतरे की ओर इशारा करता है: Deepfake और AI इन्फ्लुएंसर्स अब सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रोपेगेंडा और वित्तीय धोखाधड़ी का जरिया बन चुके हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal