बंगाल की वो 25 सीटें जहां SIR में कटे वोटरों से कम है जीत का अंतर, सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या कहा था?
TV9 Bharatvarsh May 05, 2026 04:43 PM

बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की खूब चर्चा है. बंगाल की कम से कम 25 ऐसी सीटें हैं, जहां जीत के मार्जिन से ज्यादा नाम SIR के तहत अयोग्य पाए गए थे. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब इन सीटों पर फिर से मतदान हो सकते हैं? क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर सुनवाई के दौरान कहा था कि SIR में अयोग्य पाए गए वोटरों की तुलना में अगर जीत की मार्जिन कम रहती है तो हम इस तरह के मामले को देखा जा सकता है.

केंद्रीय चुनाव आयोग ने निर्वाचन से पहले बंगालमें SIR के तहत कुल 27 लाख मतदाताओं को अयोग्य पाया था. मतदान से ठीक पहले इनके नाम हटाए गए थे. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कम से कम 34 लाख ऐसे वोटर हैं, जिनके नाम गलत तरीके से काटे गए. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.

पहले जानिए किन सीटों पर ऐसा हुआ?

पहला मामला ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट का ही है. यहां पर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने करीब 15 हजार वोटों से जीत दर्ज की है. चुनाव आयोग ने यहां पर एसआईआर के तहत 28 हजार मतदाताओं के वोट काट दिए थे, जबकि यहां पर 14,154 मतदाताओं के नाम विचाराधीन हैं.

चंपदानी में बीजेपी के दिलीप सिंह को 3026 वोटों से जीत मिली है. सिंह ने यहां पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया है. द इकॉनोमिक्स टाइम्स के मुताबिक इस सीट पर एसआईआर के तहत 7600 से ज्यादा वोट अयोग्य पाए गए थे. इसी तरह करंदीघी सीट से बीजेपी के बिराज विस्वास ने 19869 वोटों से जीत मिली थी. यहां पर 31,562 मतदाताओं के नाम एसआईआर में अयोग्य पाए गए थे.

मुर्शिदाबाद की जंगीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी को 10,542 वोटों से जीत मिली है. यहां पर 36,581 वोटरों को अयोग्य पाया गया है. मोंटेश्वर सीट पर बीजेपी को 14,700 वोटों से जीत मिली है. यहां पर 23,423 वोटरों को अयोग्य माना गया था. हेमताबाद सीट पर एसआईआर के तहत 18,215 अयोग्य पाए गए थे. यहां पर बीजेपी उम्मीदवार को 12,300 वोटों के अंतर से जीत मिली है.

बाली सीट पर 11,997 सीटों से बीजेपी को जीत मिली है. यहां एसआईआर में 11,386 मतदाता अयोग्य पाए गए थे, जिनका मामला सुप्रीम कोर्ट में है. दिन्हटा, रैना और दार्जिलिंग की सीट पर भी ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला.

समसेरगंज, मानिकचक, सूती, लालगोला और रघुनाथगंज की सीटों पर भी अयोग्य मतदाताओं की तुलना में जीत की मार्जिन कम है. समसेरगंज में 75,000 मतदाता अयोग्य पाए गए थे. यहां पर 7500 वोटों के अंतर से तृणमूल के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की है. इसी तरह मानिकचक में 55 हजार वोटरों को अयोग्य पाया गया था. यहां पर जीत का अंतर 19 हजार है.

जिन जिलों में ज्यादा वोट कटे, वहां का हाल

मुर्शिदाबाद में एसआईआर के तहत 4 लाख से ज्यादा वोट डिलीट किए गए थे. मुर्शिदाबाद की 22 सीटों में से 8 पर बीजेपी और 9 पर तृणमूल को जीत मिली है. 5 सीटों पर कांग्रेस, सीपीएम और जनता उन्नयन पार्टी ने जीत दर्ज की है. 2021 में तृणमूल को यहां की 19 सीटों पर जीत मिली थी.

बंगाल की सिर्फ 3 जिलों में बीजेपी को तृणमूल से कम सीटें मिली हैं. वो जिले हैं- मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और साउथ 24 परगना. बाकी के सभी जिलों में बीजेपी ने तृणमूल से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है.

SIR सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

23 अप्रैल को सुनवाई के दौरान जस्टिस जे बागची ने कहा था- मान लीजिए, अगर विधानसभा सीट पर जीत का मार्जिन 2 प्रतिशत रहता है और 15 प्रतिशत लोग वोट नहीं डाल पाते हैं तो ऐसी स्थिति में क्या हो सकता है? उन्होंने कहा कि इसे हमें देखना होगा.

ऐसे में अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट और तृणमूल कांग्रेस की ओर है. क्या टीएमसी इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा सकती है?

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