ट्रंप-ईरान युद्ध ने नाक में दम कर दिया! IMF ने कहा- और बुरे होंगे हालात, मंदी का खतरा टालना नामुमकिन
एबीपी बिजनेस डेस्क May 06, 2026 01:12 PM

US-Iran War: यूएस और ईरान के बीच चल रहा युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसके कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्था गड़बड़ाई हुई है. हर किसी की निगाहें अब केवल इस युद्ध के थमने का इंतजार कर रही हैं. इसी बीच अब खबरें ये भी हैं कि ये युद्ध इतनी जल्दी और आसानी से खत्म नहीं होने वाला है. इस बारे में IMF चीफ ने जानकारी दी है. साथ ही साथ उन्होंने युद्ध के हालातों के बीच दुनियाभर के संघर्षों के बारे में बात करते हुए कहा है कि अभी ये स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है.

क्या बोलीं IMF चीफ?
हाल ही में IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा लॉस एंजिल्स में मिल्केन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं. इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में युद्ध की स्थिति पर बात की औक बातया कि, 'अगर मिडिल ईस्ट का युद्ध लंबा खिंचा, तो हालात और बुरे होंगे. तीन हफ्ते पहले इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) द्वारा आर्थिक विकास के जो अनुमान लगाए गए थे, वे अब रिलेवेंट नहीं रहे, क्योंकि फारस की खाड़ी में चल रहे लंबे युद्ध का मतलब है कि विकास दर कम होगी और महंगाई बढ़ेगी'.

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युद्ध खिंचेगा तो बुरी होगी स्थिति
इतना ही नहीं बल्कि IMF चीफ ने सोमवार को चेतावनी देते हुए बताया कि महंगाई पहले से ही बढ़ रही है, और अगर मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव 2027 तक खिचता है, तो बहुत नुकसान का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने ये भी कहा कि अगर तेल की कीमतें लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती हैं, तो पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को 'बहुत बुरे नतीजों' का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने ये भी बताया कि पहले लगाए गए महंगाई के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी बताई गई थी वो अब संभव नहीं है. आने वाले समय में बहुत ज्यादा महंगाई बढ़ सकती है.

बता दें कि ईरान और अमेरिकी के बीच युद्ध फरवरी 2026 से चल रहा है. जिसमें इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के ऊपर हमला किया था, जिसमें सैन्य बुनियादी ढांचे और परमाणु केंद्रों पर लगभग 900 हवाई हमले किए गए. इन हमलों को इजरायल और अमेरिका ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया था. जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई समेत कई बड़े नेता और आम लोगों की जान गई हैं. जिसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमले किए. बीच में संघर्षों को रोककर बातचीत की स्थिति भी बनी लेकिन इससे भी कोई फायदा नहीं हुआ.

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