Budhwa Mangal 2026: आसमान से बरसती 'आग' के बीच क्यों पड़ते हैं बड़े मंगल?
TV9 Bharatvarsh May 06, 2026 02:43 PM

Bada Mangal in Heat Month: ज्येष्ठ माह की तपती दोपहरी, लू के थपेड़े और आसमान से बरसती आग जैसी गर्मी इसी कठिन समय में आते हैं हर साल बड़े मंगल .साल 2026 में 5 मई को ज्येष्ठ मास का पहला बड़ा मंगल श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास के मंगलवार को विशेष महत्व दिया गया है, जिन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. यह दिन भगवान हनुमान को समर्पित होता है और मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

इस साल ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा. खास बात यह है कि 17 मई से 15 जून तक अधिक मास भी पड़ रहा है, जिससे इस बार कुल 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर ये बड़े मंगल हमेशा इतनी भीषण गर्मी के बीच ही क्यों आते हैं? इसके पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि गहरा पौराणिक और वैज्ञानिक संदेश भी छिपा है.

गर्मी और बड़े मंगल का क्या है संबंध?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास को वर्ष का सबसे गर्म समय माना जाता है. इस दौरान सूर्य देव अपनी प्रचंडता के चरम पर होते हैं. इसी समय भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व इसलिए बताया गया है क्योंकि हनुमान जी को शक्ति, ऊर्जा और संकटमोचन का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि जब प्रकृति अपने सबसे कठिन रूप में होती है, तब ईश्वर की भक्ति से मनुष्य को मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है.

आसमान से बरसती आग और सेवा का संकल्प

इस तपती गर्मी में बड़े मंगल का आयोजन एक बहुत बड़ा सामाजिक और आध्यात्मिक भी संदेश देता है. जब प्यास से गला सूख रहा हो, तब जगह-जगह प्याऊ और भंडारों का आयोजन करना मानवता की सबसे बड़ी सेवा है. बड़े मंगल पर गुड़-धनिया और ठंडे शरबत का वितरण यह सिखाता है कि भीषण परिस्थितियों में भी दूसरों की मदद कैसे की जाती है. जिस तरह हनुमान जी शक्ति और संयम के प्रतीक हैं, ज्येष्ठ की गर्मी में उनकी पूजा करना भक्त के धैर्य और अटूट श्रद्धा को दर्शाता है. इसलिए तपती गर्मी में हनुमान जी की पूजा को कष्टों से मुक्ति और मानसिक शांति का माध्यम माना जाता है.

क्यों ज्येष्ठ मास में ही मनाते हैं बड़ा मंगल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास और मंगलवार का संबंध हनुमान जी के जीवन की दो सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा है. माना जाता है कि त्रेतायुग में ज्येष्ठ मास के मंगलवार के दिन ही हनुमान जी की मुलाकात पहली बार भगवान श्री राम से हुई थी. एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, इसी मास के मंगलवार को हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धरकर भीम का घमंड तोड़ा था.वृद्ध रूप धारण करने के कारण ही इसे बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है.

ये भी पढ़ें: बड़ा मंगल क्या है और क्यों मनाया जाता है? जानें कैसे हुई इसे मनाने की शुरुआत

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.