140 करोड़ की आबादी में 'मदर इकोनॉमी', फैशन से लेकर ऑनलाइन बिजनेस तक, लहरा रहा परचम
TV9 Bharatvarsh May 09, 2026 11:42 AM

आज भारत एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है. अब महिलाएं सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर क्षेत्र में आगे बढ़कर देश की आर्थिक ताकत को मजबूत बना रही हैं. 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में अब मदर इकोनॉमी एक बड़ी आर्थिक ताकत बनकर उभर रही है. घर और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं फैशन, ऑनलाइन सेलिंग, डिजिटल सर्विस, स्टार्टअप और छोटे कारोबारों में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं.

मदर्स डे के मौके पर यह बदलाव सिर्फ महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की कहानी नहीं है, बल्कि उस नई सोच का संकेत है, जहां महिलाएं देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा रही हैं. आज लाखों महिलाएं अपने हुनर को बिजनेस में बदलकर आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर मजबूत कर रही हैं.

रोजगार में तेजी से बढ़ी महिलाओं की भागीदारी

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, महिलाओं की वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) 2017-18 में 22% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 40.3% हो गई है. वहीं महिलाओं की बेरोजगारी दर 2017-18 में 5.6% थी, जो घटकर 2023-24 में 3.2% रह गई. ग्रामीण भारत में महिलाओं की भागीदारी सबसे तेजी से बढ़ी है. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में 96% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि शहरी इलाकों में यह बढ़ोतरी 43% रही.

पढ़ाई के साथ बढ़ी रोजगार क्षमता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला ग्रेजुएट्स की रोजगार पाने की क्षमता 2013 में 42% थी, जो 2024 में बढ़कर 47.53% हो गई.
वहीं पोस्टग्रेजुएट और उससे ऊपर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं की रोजगार दर 2017-18 के 34.5% से बढ़कर 2023-24 में 40% तक पहुंच गई है. ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अब देश की आर्थिक प्रगति में पहले से ज्यादा योगदान दे रही हैं.

नौकरी और स्वरोजगार दोनों में बढ़ीं महिलाएं

EPFO के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सात सालों में 1.56 करोड़ महिलाएं वर्कफोर्स में शामिल हुई हैं. वहीं अगस्त 2025 तक e-Shram पोर्टल पर 16.69 करोड़ से ज्यादा असंगठित क्षेत्र की महिला कामगारों का रजिस्ट्रेशन हुआ है. इससे उन्हें कई सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ मिल रहा है. PLFS के मुताबिक, महिलाओं के स्वरोजगार में भी बड़ा उछाल आया है. 2017-18 में यह आंकड़ा 51.9% था, जो 2023-24 में बढ़कर 67.4% हो गया.

सरकारी योजनाओं से मिला बड़ा सपोर्ट

महिला कारोबारियों को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं. देशभर में 15 मंत्रालयों की 70 केंद्रीय योजनाएं और 400 से ज्यादा राज्य स्तरीय योजनाएं महिलाओं को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण दे रही हैं. पिछले एक दशक में जेंडर बजट में 429% की बढ़ोतरी हुई है. यह FY 2013-14 में 0.85 लाख करोड़ रुपये था, जो FY 2025-26 में बढ़कर 4.49 लाख करोड़ रुपये हो गया. यह दिखाता है कि अब फोकस सिर्फ महिला विकास नहीं, बल्कि महिला नेतृत्व वाले विकास पर है.

स्टार्टअप और बिजनेस में महिलाओं का बढ़ता दबदबा

DPIIT में रजिस्टर्ड 1.54 लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स में से करीब 50% में महिला डायरेक्टर है. यानी 74,410 स्टार्टअप्स में महिलाओं की भागीदारी है. आज करीब 2 करोड़ महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं. वहीं नमो ड्रोन दीदी और दीनदयाल अंत्योदय योजना-NRLM जैसी योजनाएं महिलाओं को नए अवसर और संसाधन उपलब्ध करा रही हैं. PM मुद्रा योजना के तहत कुल लोन का 68% महिलाओं को मिला है. महिलाओं को 35.38 करोड़ से ज्यादा लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रुपये है. वहीं PM स्वनिधि योजना के लगभग 44% लाभार्थी महिलाएं हैं.

अब रोजगार देने वाली बन रही हैं महिलाएं

महिलाओं के स्वामित्व वाले कारोबारों की हिस्सेदारी 2010-11 में 17.4% थी, जो 2023-24 में बढ़कर 26.2% हो गई है. वहीं महिला नेतृत्व वाले MSMEs की संख्या लगभग दोगुनी होकर 1 करोड़ से बढ़कर 1.92 करोड़ पहुंच गई है. आज महिलाएं सिर्फ नौकरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद रोजगार पैदा कर रही हैं और दूसरों को भी काम दे रही हैं.

हर सेक्टर में महिलाओं का योगदान
  • कृषि क्षेत्र

भारत में सबसे ज्यादा महिलाएं कृषि क्षेत्र में काम करती हैं. गांवों की महिलाएं खेती, डेयरी, पशुपालन, मछली पालन और फूड प्रोसेसिंग में बड़ी भूमिका निभा रही हैं.

  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

टेक्सटाइल, कपड़ा उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसी इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है.

  • सर्विस सेक्टर

महिलाएं बैंकिंग, हेल्थकेयर, एजुकेशन, होटल इंडस्ट्री, रिटेल, IT और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं.

  • स्टार्टअप सेक्टर

फिनटेक, एडटेक, फैशन, हेल्थ, ब्यूटी और फूड बिजनेस में महिलाएं तेजी से अपने स्टार्टअप शुरू कर रही हैं.

  • सरकारी नौकरियां

महिलाएं प्रशासन, सेना, पुलिस, रेलवे, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय शासन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं. नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हैं.

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