Kalashtami 2026: सनातन धर्म में कालाष्टमी व्रत बहुत पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है. ये व्रत भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित किया गया है. ये व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाता है. आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है. ऐसे में आज कालाष्टमी का व्रत है. कालाष्टमी के दिन व्रत के साथ-साथ विधि-विधान से काल भैरव देव की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन व्रत और काल भैरव देव की पूजा करने से जीवन के सारे दुख और संकट समाप्त होते हैं.
कालाष्टमी के दिन पूजा के समय काल भैरव देव को कुछ विशेष चीजों का भोग अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन पूजा के समय भोग अर्पित करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन में धन और सुख-समृद्धि बढ़ती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि कालाष्टमी के दिन काल भैरव देव को किन चीजों का भोग लगाना चाहिए?
कालाष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त (Kalashtami 2026 Puja Subh Muhurat)कालाष्टमी के दिन काल भैरव देव की पूजा निशिता काल में करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. आज निशिता काल रात में 11 बजकर 56 मिनट से लेकर 12 बजकर 38 मिनट तक रहने वाला है. इस बीच आप भगवान काल भैरव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
काल भैरव को लगाएं इन चीजों का भोग (Kalashtami Bhog)कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव को हलवा, खीर, गुलगुले (मीठे पुए) जलेबी, फल, मदिरा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, मुखवास, आटे व मेवे से बने लड्डू और चना आदि का भोग लगाना चाहिए.
काल भैरव की पूजा विधि (Kaal Bhairav Puja Vidhi)काल भैरव की पूजा उनके मंदिर में जाकर या फिर अपने घर के ईशान कोण में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर करें. भगवान भैरव के चित्र को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रखें. इसके बाद उस पर गंगाजल छिड़कें और पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, काली उड़द की दाल, वस्त्र आदि अर्पित करके विधिपूर्वक पूजन करें.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.