Astrology: ज्योतिष शास्त्र और वैदिक शास्त्र में सूर्य को पिता, शासन, नेतृत्व और आत्मबोधका प्रतीक माना गया है. आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति और उसकी दिशा निर्धारित करती है कि आपका भाग्य किसी और जाएगा और आपको क्या हनी और लाभ हो सकते हैं. सूर्य देव को सनातन धर्म में दृश्य देवता माना गया है, यह कलयुग में एकमात्र देवता है जिनको देखा जा सकता हैं.
सूर्य हमारे जीवन में प्रकाश और तेज लाता है. जैसे सूर्य उदय होने से हमारे जीवन में अंधकार मिट जाता है, वैसे ही कुंडली में अगर सूर्य अच्छे स्थान पर होता है तो व्यक्ति के जीवन में असफलता है जाती है और व्यक्ति को समझ में मान सम्मान उच्च पद की प्राप्ति होती है.
इसके अलावा स्त्रियों की कुंडली में सूर्य उनके पति के जीवन में जीवन के बारे में भी बताता है. कुंडली में सूर्य सभी 12 भावों में अपना अलग असर दिखता है लेकिन किस भाव में बैठे सूर्य पर किस राशि की दृष्टि है या फिर सूर्य किस राशि में बैठा है यह स्थिति भी सूर्य पर अधिक प्रभाव डालती है.
बलवान सूर्य: करियर में सफलता
जब सूर्य की स्थिति कुंडली में अच्छी हो यानी कि सूर्य दसवें भाव में , पहले भाव में या फिर नौवें भाव में हो तो सूर्य लोगों को अपने कार्य क्षेत्र में पहचान दिलाता है. इस समय सरकारी नौकरी मिलना, पुरस्कार प्राप्त करना, समाज में मान सम्मान मिलना यह बहुत आम सी बात हो जाती है.
इंसान आत्मविश्वास से भर जाता है और उसके अंदर की इच्छा शक्ति उसे सम्मान प्राप्त करने में और आसानी से जिम्मेदारियां निभाने में मदद करती है निर्णय लेने की क्षमता भी बहुत मजबूत हो जाती है और अपने कार्य क्षेत्र में वह भरोसेमंद व्यक्ति साबित होता है.
कमजोर सूर्य : कार्य क्षेत्र में चुनौतियां
अगर सूर्य कमजोर हो तो व्यक्ति को मेहनत का फल प्राप्त नहीं होता और अक्सर बदनामी का सामना करना पड़ता है. इस समय व्यक्ति जहां काम कर रहा हो वहां के मालिक से बहस या फिर सरकारी विवाद, पद का नुकसान होना या फिर करियर में ठहराव आना मुमकिन है.
व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास की कमी आ जाती है और पेशेवर तौर पर अपनी बात मनवाना नामुमकिन सा होने लगता है. यदि सूर्य छठे या आठवें भाव में हो तो शत्रुओं का उत्पन्न होना और गुप्त शक्तियों का अचानक से प्रकट होना और कैरियर में रुकावटें लाना संभव हो सकता है. इसके साथ ही व्यक्ति ने अपने खान-पान का अगर अच्छे से ध्यान नहीं रखा तो बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है.
सूर्य को कुंडली में ठीक करने के उपाय:–
सूर्य को अर्घ्य: रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में उठकर तांबे के लोटे से सूर्योदय के समय सूर्य को जल अर्पित करें.
पिता का सम्मान: अपने पिता या पिता समान व्यक्तियों का सम्मान करना शुरू कर दे सूर्य स्वत: ही फल प्रदान करना शुरू कर देता है.
सूर्य का वैदिक मंत्र
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।
सूर्य का तांत्रिक मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नमः।।
सूर्य का बीज मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।।
अगर हम सूर्य के अनुशासन और उसके प्रकाश को अपने जीवन में उतारते हैं, तो हमारा भाग्य जीवन की स्थिति स्वयं चमकने लगती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.