केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की देखरेख में शुरू की गई यह पहल आर्थिक विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप है मानी जा रही है। सीएसआईआर-सीएफटीआरआई मैसूर के वैज्ञानिकों ने कलाड़ी चीज की क्वालिटी, टेक्सचर और न्यूट्रिशनल वैल्यू को बनाए रखते हुए, रेफ्रिजरेटर में इसकी शेल्फ-लाइफ को सफलतापूर्वक 21 दिनों तक बढ़ा दिया है।
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उम्मीद है कि इस उपलब्धि से उत्पादकों को बड़े बाजारों तक पहुंचने और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट का अगला चरण कलाड़ी को एक ऐसे कमर्शियल उत्पाद में बदलने पर केंद्रित होगा जिसे देशभर में प्रोफेशनल फूड चेन, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और अलग-अलग तरह के खानपान में इस्तेमाल किया जा सके।
इस तकनीकी बदलाव से स्थानीय किसानों, डेयरी उत्पादकों और इस क्षेत्र के पारंपरिक चीज-निर्माण इकोसिस्टम से जुड़े उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सीएसआईआर-आईआईआईएम जम्मू ने कहा कि वह विज्ञान आधारित इनोवेशन के जरिए क्षेत्र विशेष के उत्पादों को बढ़ावा देने और टिकाऊ आजीविका व आर्थिक विकास के लिए उनकी वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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इस विकास की जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दी। उन्होंने पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने और साथ ही आधुनिक तकनीक के ज़रिए उसकी बाजार क्षमता को बढ़ाने में वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया है।
Edited By : Chetan Gour