1000 साल पुरानी गंज-ए-शहीदा मस्जिद होगी ध्वस्त! रेलवे ने चस्पा किया नोटिस, काशी स्टेशन प्रोजेक्ट की जद में आई
TV9 Bharatvarsh June 16, 2026 10:43 PM

Varanasi News: काशी रेलवे स्टेशन के कायाकल्प और मल्टी मॉडल हब के रूप में डेवलप करने के लिए काशी रेलवे स्टेशन को लगभग ₹350 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं वाले ‘इंटर-मॉडल स्टेशन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट की जद में आने वाले सभी मस्जिद, मजार और मंदिर को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण अभियान चल रहा है. दो जून को 200 साल पुरानी ‘अजगैब शहीद मस्जिद’ को ध्वस्त करने के बाद अब गंज-ए-शहीदा मस्जिद को ध्वस्त करने की तैयारी पूरी कर ली गई है.

20 जून को रेलवे और जिला प्रशासन संयुक्त कार्रवाई कर इस मस्जिद को ध्वस्त करेगा. बीते दो जून को अजगैब शहीद मस्जिद के बाद ये दूसरी बड़ी मस्जिद है, जिसको ध्वस्त किया जाएगा. रेलवे द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में यह कहा गया है कि, “यूनियन ऑफ इंडिया बनाम अंजुमन इंतजामिया मूलवाद संख्या-1174/1991 जो कि माननीय न्यायालय सिविल जज (जू.डी) में चल रहा था. उसको न्यायालय ने 28-8-2024 को खारिज कर दिया था.”

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20 जून को कार्रवाई करेगा रेलवे

अब रेलवे प्रशासन ने अवैध रूप से बनी इस मस्जिद को हटाने का निर्णय लिया है. रेलवे प्रशासन ने 20 जून से पहले मस्जिद कमेटी से आवश्यक चीजें हटा लेने की सलाह दी है. रेलवे द्वारा करीब एक हजार साल पुरानी इस मस्जिद को ध्वस्त करने की नोटिस चस्पा होने के बाद अब अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी मस्जिद के बचाव में आ गई है. इस मस्जिद की देख-रेख करने वाले अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी मोहम्मद यासीन ने रेलवे के नोटिस के ठीक नीचे अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से नोटिस चस्पा किया है.

गंज शहीदा मस्जिद को लेकर नोटिस पर उठाए सवाल

कमेटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 12 जून 2026 की घटना को लेकर बनारस और बनारस से बाहर के इंसाफ पसंद लोगों, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय में भारी बेचैनी व्याप्त है. कमेटी का आरोप है कि गंज शहीदा परिसर में रात के अंधेरे में प्रशासनिक मशीनरी द्वारा कार्रवाई की गई, जिससे लोगों में असंतोष और चिंता का माहौल है.

कमेटी ने यह भी कहा कि जिस नोटिस को परिसर में चस्पा किया गया, उस पर न तो कोई दिनांक अंकित है और न ही किसी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं. ऐसे में नोटिस की वैधता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बयान में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित मुकदमे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. कमेटी के अनुसार, मामला अदम पैरवी (पैरवी न होने) के कारण खारिज हुआ था. इसका कारण यह था कि उनके अधिवक्ता रईस अंसारी की पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं और बाद में उनका निधन हो गया. उसी अवधि में ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े मुकदमे भी अपने चरम पर थे.

कब बनाई गई थी गंज-ए-शहीदा मस्जिद?

कमेटी का कहना है कि यह मुकदमा वर्ष 1991 में अंजुमन मसाजिद की ओर से गंज शहीदा मस्जिद के बाहर की भूमि को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से दायर किया गया था. उनके अनुसार मस्जिद का निर्माण वर्ष 1034 ईस्वी में हुआ था और इसका उल्लेख वर्ष 1880 के किलाकोहना नक्शे तथा वर्ष 1883-84 के बंदोबस्त नक्शे में भी दर्ज है, जबकि रेलवे स्टेशन की स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी.

कमेटी ने दावा किया है कि रेलवे प्रशासन ने अपने शपथ पत्र में मस्जिद को निर्विवाद रूप से मुस्लिम समुदाय की संपत्ति माना है. इसके अलावा यह संपत्ति वक्फ बोर्ड में दर्ज है तथा उम्मीद पोर्टल पर भी इसका पंजीकरण हो चुका है. कमेटी ने कहा कि वह इस मामले में अपना पक्ष उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर रही है और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा करेगी.

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