क्या इंग्लैंड की टीम में थॉमस ट्यूशेल की कोचिंग स्टाफ में सेट-पीस कोच शामिल हैं?
राजेश वर्मा June 19, 2026 01:33 AM

इंग्लैंड की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम सेट-पीस गोलों के मामले में दुनिया की सबसे प्रभावशाली टीमों में से एक है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इसकी वजह क्या है?

2026 विश्व कप के उद्घाटन मैच में ही इंग्लैंड ने क्रोएशिया के खिलाफ दो शानदार सेट-पीस गोल दागकर यह साबित कर दिया कि इस क्षेत्र में उनकी तैयारी कितनी मजबूत है।

हैरी केन ने पहले पेनल्टी पर (दूसरे प्रयास में) गोल किया, और फिर एक कॉर्नर से मिले मौके पर जोरदार हेडर लगाकर गोल दागा। इन दोनों मौकों ने दिखाया कि अच्छी तरह से तैयार की गई सेट-पीस रणनीति कितनी प्रभावी हो सकती है।

थॉमस ट्यूशेल, जो इंग्लैंड टीम के प्रमुख कोच हैं, ने इस पहलू को लेकर काफी गंभीरता दिखाई है। उन्होंने अपने सहायक मैनेजर एंथनी बैरी को टीम के लिए सेट-पीस कार्यों की देखरेख की जिम्मेदारी दी है।

क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल दोनों स्तरों पर कई टीमें अब विशेष सेट-पीस कोच की नियुक्ति करती हैं, और इंग्लैंड भी इस रणनीति से लाभ उठा रहा है।

हालांकि, ट्यूशेल ने इस क्षेत्र में केवल बैरी पर ही भरोसा नहीं किया है। उन्होंने पॉल क्विल्टर को भी टीम में शामिल किया है, जो एक समर्पित सेट-पीस कोच के रूप में कार्य कर रहे हैं।

पॉल क्विल्टर ने पहले 2011 से 2025 तक चेल्सी में एनालिस्ट के रूप में काम किया था, और बीच में कुछ समय ऑल्डरशॉट टाउन क्लब के साथ भी बिताया था।

चेल्सी में काम करते हुए ही क्विल्टर की मुलाकात ट्यूशेल से हुई थी। वहीं से उन्होंने एक विश्वसनीय विश्लेषक के रूप में अपनी पहचान बनाई, जिसके बाद ट्यूशेल ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी टीम में शामिल करने का निर्णय लिया।

द टाइम्स से बातचीत में ट्यूशेल ने क्विल्टर और बैरी दोनों के योगदान की सराहना करते हुए कहा, “मेरे सहायक कोच और हमारे सेट-पीस कोच को पूरा श्रेय जाता है।”

अपने टूर्नामेंट स्क्वाड की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्यूशेल ने बताया कि सेट-पीस उनकी रणनीति का एक विशेष हिस्सा है। उन्होंने कहा, “हमारे पास हर संभावित परिस्थिति के लिए विशेषज्ञ मौजूद हैं। हमने हमेशा कहा है कि हम एक मजबूत सेट-पीस टीम बनना चाहते हैं, और इसके लिए हमारे पास विशेषज्ञ हैं।”

स्पष्ट है कि इंग्लैंड की हालिया सफलता के पीछे केवल खिलाड़ियों की प्रतिभा ही नहीं, बल्कि कोचिंग स्टाफ की गहराई और रणनीतिक तैयारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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