Supaul police cough syrup scam:बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है. सरकार लगातार नशे के कारोबार पर सख्ती का दावा करती रही है, लेकिन ये खुद थाने से ही संचालित होने लगे तो इसे क्या कहा जाए? आरोप है कि प्रतापगंज थाने के मालखाने में जब्त नशीले कफ सिरप की बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर उसे नशे के आदी लोगों को बेचा जा रहा था. मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है.
बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को गुप्त सूचना मिली थी कि प्रतापगंज थाना के मालखाने से जब्त कोडीन युक्त कफ सिरप चोरी-छिपे बेचा जा रहा है. सूचना के आधार पर तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई. जांच शुरू होते ही चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
6162 कफ सिरप की बोतलें गायब थींजांच में पाया गया कि एक मामले में पुलिस ने 7560 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप जब्त किया था. इनमें से 8 बोतल फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) जांच के लिए भेजी गई थीं. ऐसे में मालखाने में 7552 बोतलें मौजूद होनी चाहिए थीं, लेकिन मौके पर केवल 1390 बोतलें ही मिलीं. यानी कुल 6162 बोतलें गायब थीं. जांच टीम का मानना है कि इन बोतलों को लंबे समय से अवैध रूप से बेचकर ठिकाने लगाया जा रहा था.
मामला तब और गंभीर हो गया जब जांचकर्ताओं को मालखाने में 2842 ऐसी बोतलें मिलीं, जिनका निर्माण वर्ष 2026 में हुआ था और जिनका बैच नंबर तथा ब्रांड जब्त किए गए माल से पूरी तरह अलग था. इससे यह आशंका मजबूत हुई कि गायब स्टॉक को छिपाने के लिए दूसरे ब्रांड की नई बोतलें रख दी गई थीं.
सिर्फ कफ सिरप ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि थाने में जब्त वाहनों के टायर, टोटो की बैटरियां, डायनेमो और अन्य सामान भी गायब किए जा रहे थे. जब टीम ने सीसीटीवी फुटेज की जांच करनी चाही तो संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला, जिससे संदेह और गहरा गया.
चौकीदार ने किए बड़े खुलासेजांच के दौरान गिरफ्तार चौकीदार राहुल कुमार ने कई अहम खुलासे किए. उसने बताया कि त्रिवेणीगंज निवासी आशीष नामक व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद मालखाने से कफ सिरप निकालकर बेचने का सिलसिला शुरू हुआ. इस काम में अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल-112 चालक अखिलेश कुमार भी शामिल थे.
आरोप है कि रात के समय मालखाने से कफ सिरप निकालकर बाहर सप्लाई किया जाता था और उससे मिलने वाली रकम आपस में बांट ली जाती थी. राहुल ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी थाने में जब्त शराब, कफ सिरप, बाइक के पार्ट्स और अन्य सामान बेच चुका है. जांच में यह भी सामने आया कि एक लूटकांड में इस्तेमाल की गई अपाची बाइक को कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के दबाव में छोड़ दिया गया था.
मामले में प्रतापगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है. वहीं चौकीदार राहुल कुमार, रंजन राज, मनीष कुमार और अखिलेश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.
सुपौल के पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विशेष जांच कराई गई थी. प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई है और मामले की जांच अभी भी जारी है. विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
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