आंध्र प्रदेश की नई पहचान, जोन्नागिरी में शुरू हुई प्राइवेट सोने की खदान, क्या गोल्ड आयात पर निर्भरता कम होगी?
et June 24, 2026 07:42 PM
भारत में आज देश की सबसे बड़ी प्राइवेट सोने की खदान का उद्घाटन हो गया। आंध्र प्रदेश का कुरनूल जिला अब सोने की खदान के लिए जाना जाएगा। यहां के जोन्नागिरी में मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने 405 करोड़ की लागत से बनी निजी गोल्ड माइनिंग परियोजना का उद्घाटन किया। यह भारत की स्वतंत्रता के बाद पहली प्राइवेट गोल्ड माइन होगी। जहां पहले साल ही लगभग 400 किलो सोने का उत्पादन होने की उम्मीद लगाई जा रही है। यदि हर साल इस सोने की खदान से भारी मात्रा में सोना निकलता है तो क्या भारत की दूसरे देशों पर निर्भरता यानी सोने के आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी?

जोन्नागिरी सोने की खदान के बारे में जानेंइस निजी गोल्ड माइन प्रोजेक्ट की लागत 405 करोड़ रुपये है।

इसकी शुरुआत से राज्य में लगभग 700 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने 1,500 एकड़ जमीन का आवंटन किया है।

राज्य सरकार को सोने के उत्पादन पर चार प्रतिशत की रॉयल्टी भी मिलेगी।

यानी इस सोने के खदान से न केवल और लोगों को रोजगार मिलेगा बल्कि की सरकार की आय भी बढ़ेगी।

यह भी उम्मीद की जा रही है कि पहले साल इस खदान से लगभग 400 किलो सोने का उत्पादन किया जाएगा। इसके बाद उत्पादन की मात्रा 900 किलो सालाना तक बढ़ सकती है।

जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड द्वारा इस परियोजना का विकास किया गया है।

आंध्र प्रदेश की नई पहचानअब आपसे यदि कोई पूछे कि भारत की प्राइवेट सोने की खदान कहां है तो इसका जवाब आप आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में देंगे। आंध्र प्रदेश को प्राइवेट सोने की खदान से नई पहचान मिली है।

क्या घटेगा सोने के आयात पर निर्भरता?भारत में सोने के डिमांड काफी ज्यादा है। हर साल लगभग 700 से 800 टन सोना हम दूसरे देशों से खरीदते हैं। जोन्नागिरी में सोने की खदान में इतना उत्पादन नहीं होगा। पहले साल लगभग 400 किलो सोने का उत्पादन यानी भारत की कुल जरूरत का एक प्रतिशत भी हिस्सा मुश्किल से ही पूरा कर पाएगी। इसलिए इस खदान के शुरू होने से देश में सोने आयात में तुरंत बड़ी कमी नहीं आएगी। बाद में उत्पादन बढ़ने के बाद स्थिति बदल सकती है।
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