
Patna, 29 जून . बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कथित ‘रिशु श्री महाघोटाले’ को लेकर राज्य की एनडीए Government पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने Government से 20 सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि हजारों करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में बड़े अधिकारियों और सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है.
तेजस्वी यादव ने Monday को एक बयान जारी कर सवाल उठाया कि एक मामूली ठेकेदार कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे प्रभावित कर रहा था और इतने वर्षों तक सरकारी निगरानी तंत्र क्या कर रहा था. उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के सामने आए चैट सही हैं, तो यह स्पष्ट करता है कि आरोपी को वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था. ऐसे में यह सामने आना चाहिए कि वह किसके इशारे पर अधिकारियों को निर्देश देता था.
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में केवल छोटे अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि कथित तौर पर बड़े अधिकारियों और Political संरक्षण देने वालों को बचाया जा रहा है. उन्होंने पूछा कि दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन के बावजूद उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और चार्जशीट में उनके नाम क्यों शामिल नहीं किए गए. राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि जांच में सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर दिलाने के बदले दो से साढ़े तीन प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने की बात सामने आई है.
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है तो यह Government के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर गंभीर सवाल खड़े करता है. तेजस्वी यादव ने Government से यह भी पूछा कि आरोपी और उससे जुड़ी कंपनियों को मिले सभी सरकारी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच क्यों नहीं कराई जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि Government अपने पसंदीदा अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कथित लाभार्थी कंपनियों में Gujarat की कंपनियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि छापेमारी में आरोपी के पास से 99 संपत्तियों के दस्तावेज, करोड़ों रुपये की नकदी और आभूषण मिलने की बात सामने आई है. ऐसे में जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे पहुंची. नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि Government को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने में लंबा समय लगा. उन्होंने पूछा कि क्या इस देरी का उद्देश्य सबूत मिटाना और प्रभावशाली लोगों को बचाना था.
उन्होंने कहा कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि टेंडर माफिया पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहे थे, तो यह Government की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है. तेजस्वी यादव ने मांग की कि कथित महाघोटाले में शामिल सभी जिम्मेदार अधिकारियों, Political संरक्षण देने वालों और संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
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एमएनपी/पीएम