यूनुस सरकार में लिए गए 12633 करोड़ रुपए रिश्वत, बांग्लादेश में खुलासे से हड़कंप
TV9 Bharatvarsh June 30, 2026 01:43 AM

बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. इसकी वजह बनी है ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (TIB) की एक रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया है कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में सरकारी सेवाएं लेने के लिए लोगों ने 12,633 करोड़ टका रिश्वत दी. इस रिपोर्ट के आधार पर बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने संसद में मांग की कि अंतरिम सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में हुए सभी कथित भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए.

बांग्लादेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है. गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के डेढ़ साल के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की है. गृह मंत्री ने संसद में कहा कि अंतरिम सरकार के समय सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ और इसकी जांच भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) से कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह पता चलना चाहिए कि भ्रष्टाचार कहां हुआ, कैसे हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. उनके इस बयान का सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने मेज थपथपाकर समर्थन भी किया.

जांच की प्लानिंग नहीं है

हालांकि, सरकार के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल अंतरिम सरकार के खिलाफ कोई ऑफिशियल जांच शुरू करने की प्लानिंग नहीं है. दूसरी ओर, बीबीसी बांग्ला से बात करते हुए अंतरिम सरकार में सलाहकार रहे आसिफ महमूद साजीब भुइयां ने कहा कि अगर आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने पिछले चार महीनों से भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) को प्रभावी ढंग से काम नहीं करने दिया.

क्या कहती है TIB की रिपोर्ट?

TIB की रिपोर्ट की रिपोर्ट देखी जाए, तो उसके अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच किए गए राष्ट्रीय सर्वे में पाया गया कि सरकारी सेवा क्षेत्रों में रिश्वतखोरी पहले के मुकाबले बढ़ी है. सर्वे में 15,715 परिवारों को शामिल किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान लोगों ने कुल 12,633.2 करोड़ टका रिश्वत दी. सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार पासपोर्ट कार्यालय, BRTA (परिवहन विभाग), पुलिस, न्यायपालिका और भूमि विभाग में पाया गया. सर्वे में शामिल 86 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने कहा कि उन्हें बिना रिश्वत दिए सरकारी सेवाएं नहीं मिलतीं.

स्थिति बेहतर करने की सलाह

TIB के कार्यकारी निदेशक डॉ इफ्तेखारुज्जमान का कहना है कि अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए पर्याप्त सख्त कदम नहीं उठाए. उन्होंने कहा कि अगर उस समय सरकारी अधिकारियों की संपत्ति का सार्वजनिक खुलासा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाती, तो स्थिति बेहतर हो सकती थी. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह भ्रष्टाचार केवल अंतरिम सरकार में शुरू नहीं हुआ, बल्कि यह पहले से चली आ रही समस्या है. लेकिन यह सर्वे अंतरिम सरकार के समय का है, इसलिए उस अवधि की जिम्मेदारी सरकार से अलग नहीं की जा सकती.

फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है. एक तरफ गृह मंत्री जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष और पूर्व सलाहकार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की बात कह रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार वास्तव में ACC को सक्रिय कर इस मामले की जांच कराती है या यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है.

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