विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 से भारतीय टीम के शर्मनाक तरीके से बाहर होने के बाद, टीम के रणनीतिक फैसलों पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं। पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा और खेल विश्लेषकों ने विशेष रूप से विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जब भारत को एक बड़े और विस्फोटक स्कोर की जरूरत थी, तब ऋचा घोष जैसी आक्रामक बल्लेबाज को नंबर 4 पर प्रमोट करने के बजाय काफी नीचे बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जिससे वे क्रीज पर आकर अपने हाथ नहीं खोल सकीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऋचा घोष के पास वह ताकत और निडर रवैया है जो मध्यक्रम में विपक्षी स्पिनरों के खिलाफ तेजी से रन बटोरने के काम आ सकता था। इसके विपरीत, उन्हें तब क्रीज पर उतारा गया जब ओवर बेहद कम बचे थे और दबाव चरम पर था। इसके साथ ही, मैच के दौरान जेमिमा रोड्रिग्स को 'रिटायर आउट' न करने और ऋचा को खुलकर खेलने का मौका न देने की जिद ने भारत को 10 से 15 रन पीछे छोड़ दिया। आलोचकों का साफ कहना है कि यदि भारत को ऑस्ट्रेलिया जैसी चैंपियन टीमों को हराना है, तो ऋचा घोष जैसी मैच-विजेता खिलाड़ियों को जिम्मेदारी सौंपनी होगी और डब्ल्यूपीएल (WPL) की तरह उन्हें ऊपरी क्रम में खेलने की पूरी आजादी देनी होगी।