'रीड क्रिकेट' की ताजा विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए करो या मरो के मुकाबले से ठीक पहले पूर्व इंग्लैंड कप्तान नासिर हुसैन ने भारतीय टीम का कड़ा 'स्किल्स ऑडिट' किया था। हुसैन ने स्पष्ट किया था कि भारत की जीत की राह केवल मानसिक ब्लॉक को तोड़ने पर नहीं, बल्कि मैदान पर सही निष्पादन (Execution) पर टिकी है। इस पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बेहद खराब फील्डिंग और कैचिंग रही है। बांग्लादेश के खिलाफ मैच में भी भारत ने पावरप्ले के अंदर ही चार बेहद आसान कैच टपकाए थे।
हुसैन ने अपने आईसीसी विश्लेषण में बताया था कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत बैटिंग लाइन-अप के खिलाफ कोई भी टीम 'स्प्लिट क्रिकेट' (यानी बल्लेबाजों की तरह दावेदार दिखना और फील्डिंग में ढीले पड़ना) खेलकर नहीं जीत सकती। वहां एक भी छूटा हुआ कैच मैच का पासा पूरी तरह पलट सकता है। इस मैच में भारत के लिए सबसे मजबूत कड़ी शेफाली वर्मा थीं। बांग्लादेश के खिलाफ महज 34 गेंदों में 53 रनों की आक्रामक पारी खेलकर फॉर्म में लौटीं शेफाली के पास वह ताकत है जो ऑस्ट्रेलिया के स्पिन और पेस अटैक (विशेषकर सोफी मोलिनक्स) को बैकफुट पर धकेल सकती थी। शेफाली की आक्रामक शुरुआत से ही स्मृति मंधाना और मध्यक्रम को खुलकर खेलने का मौका मिल सकता था, लेकिन इसके साथ ही हुसैन का यह अल्टीमेटम भी उतना ही सच साबित हुआ कि अगर भारतीय फील्डर्स ने कंगारू बल्लेबाजों को एक्स्ट्रा लाइफ दी, तो मैच हाथ से निकल जाएगा—और अंततः मैच में ऐसा ही देखने को मिला।