Bonded Labour News: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के दिबियापुर थाना क्षेत्र के ग्राम खजुबैया निवासी शिवम बंधुआ मजदूरी की कैद के बाद जब अपने घर पहुंचा, तो परिवार की आंखों से खुशी और दर्द दोनों के आंसू बह निकले. छह महीने बाद बेटे को सामने देखकर मां-बाप भावुक हो गए. शिवम ने बताया कि वह गुरुग्राम में सिलाई का काम करता था. एक जनवरी को वह घर लौट रहा था, तभी रेलवे स्टेशन पर उसका पर्स और सामान चोरी हो गया.
मजबूरी में बिना टिकट यात्रा करते समय उसकी मुलाकात अंकित बालियान नाम के युवक से हुई. युवक ने नौकरी, अच्छा वेतन और रहने-खाने का लालच दिया. शिवम भरोसा कर उसके साथ चला गया, लेकिन यह फैसला उसकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक मोड़ बन गया. मुजफ्फरनगर पहुंचते ही उसे एक दोना-पत्तल फैक्ट्री में बंद कर दिया गया. वहां पहले से कई मजदूर बंधक बनाकर रखे गए थे.
शिवम ने बयां किया दर्दशिवम के मुताबिक, मजदूरों से 24 घंटे काम कराया जाता था और मुश्किल से एक से डेढ़ घंटे सोने दिया जाता था. विरोध करने पर बेल्ट, मशीन के तार और नुकीले औजारों से बेरहमी से पीटा जाता था. खाने के नाम पर पूरे दिन में सिर्फ चोकर की चार रोटियां, नमक और लाल मिर्च दी जाती थी. छह महीने तक सब्जी तक नसीब नहीं हुई. शिवम ने बताया कि फैक्ट्री से दो मजदूरों ने भागने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें पकड़कर इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उनकी मौत हो गई.
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ऐसा हुआ बंधुआ मजदूरी का खुलासायह देखकर बाकी सभी मजदूर दहशत में जीने लगे. शिवम ने बताया कि फैक्ट्री मालिकों के पास हथियार भी थे. वे हवाई फायर कर मजदूरों के मन में डर बैठाए रखते थे, ताकि कोई भागने की हिम्मत न करें. उधर, बेटे के लापता होने के बाद शिवम की मां राजरानी और पिता लगातार उसकी तलाश में जुटे रहे. उन्होंने पुलिस से गुहार लगाई, पोस्टर लगवाए और कई शहरों के चक्कर भी लगाए. आखिर एक मजदूर मौका पाकर भाग निकला और पुलिस को सूचना दी.
इसके बाद पुलिस ने छापा मारकर 13 मजदूरों को मुक्त कराया. अब शिवम घर लौट आया है, लेकिन उसके शरीर पर पड़े जख्म और मन में बैठा डर आज भी उस भयावह कैद की गवाही दे रहे हैं. परिवार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई और शिवम इस दर्द से न गुजरे.