जहां गिरे थे भरत तिवारी, वहां की मिट्टी माथे पर लगा रहे लोग… स्मारक निर्माण पर भोजपुर प्रशासन ने क्यों लगाई रोक?
TV9 Bharatvarsh June 30, 2026 10:43 PM

जिस स्थान पर भरत भूषण तिवारी को गोली लगी थी और जहां उन्होंने अंतिम सांस ली थी, वह जगह अब उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गई है. बड़ी संख्या में लोग उस स्थान पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. कई लोग वहां की मिट्टी को अपने माथे पर लगाकर उन्हें याद कर रहे हैं. भरत तिवारी की मौत के बाद समर्थकों ने उस जगह को ईंटों से घेर दिया था और अब उसी स्थान पर स्थायी स्मारक बनाने की तैयारी शुरू की गई थी. हालांकि, निर्माण शुरू होते ही प्रशासन ने भूमि विवाद का हवाला देते हुए उस पर रोक लगा दी है.

जानकारी के अनुसार, भरत भूषण तिवारी की याद में बनने वाले इस स्मारक का पूरा खर्च उत्तराखंड के मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज उठाने वाले हैं. कुछ दिन पहले स्वामी आनंद स्वरूप महाराज बिलौटी गांव पहुंचे थे, जहां उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट रखी थी. योजना के अनुसार, पहले चरण में 8×8 फीट का सफेद संगमरमर का चबूतरा बनाया जाना था.

प्रशासन ने रोका स्मारक का निर्माण

इसके बाद उसी स्थान पर भरत भूषण तिवारी की सफेद संगमरमर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी थी. पूरे परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की भी योजना बनाई गई थी, ताकि आने वाले लोग वहां श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें. स्मारक निर्माण शुरू होने के कुछ ही समय बाद प्रशासन ने काम रुकवा दिया. शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने स्पष्ट कहा कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह बिहार सरकार की जमीन है.

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NOC जरूरी

सरकारी भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण कराना नियमों के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि यदि बिना अनुमति निर्माण किया जाएगा तो प्रशासन उसे रोकेगा. मामला सिर्फ सरकारी जमीन तक सीमित नहीं है. जानकारी के अनुसार, आसपास की निजी जमीन के मालिक ने भी निर्माण को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है. उनका कहना है कि यदि स्मारक बनाया जाता है तो उसे सड़क के बीच में बनाया जाए और सड़क का विस्तार उनकी जमीन की ओर किया जाए.

प्रशासन पर पक्षपात का लगा आरोप

सरकारी और निजी, दोनों स्तर पर आपत्तियां सामने आने के बाद फिलहाल स्मारक निर्माण का काम पूरी तरह बंद हो गया है. प्रशासन की कार्रवाई के बाद इलाके में नाराजगी देखने को मिल रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन इस मामले में पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है. उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर पहले से कई स्मारक बने हुए हैं, लेकिन भरत भूषण तिवारी के स्मारक के मामले में सख्ती दिखाई जा रही है.

लोगों ने आंदोलन की दी चेतावनी

लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन का यही रवैया जारी रहा तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे. फिलहाल पूरे क्षेत्र में इसी मुद्दे की चर्चा हो रही है और सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है. इधर, भरत भूषण तिवारी के श्राद्धकर्म सह ब्रह्मभोज को लेकर भी बड़े पैमाने पर तैयारियां देखने को मिली रहीं हैं. परिजनों का दावा है कि इस आयोजन में करीब 20 से 25 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना है.

500 सदस्यों की टीम व्यवस्था में लगी

करजा, बिलौटी और ब्रह्मपुर क्षेत्र से करीब 100 अनुभवी हलवाई बुलाए गए हैं, जबकि उनके साथ लगभग 300 सहायक लगातार भोजन बनाने में जुटे हुए हैं. बड़े-बड़े कड़ाहों में दिन-रात खाना तैयार किया जा रहा है. आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए करीब 500 स्वयंसेवकों की टीम बनाई गई है, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. भरत भूषण तिवारी की यादें अब बिहार की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देने लगी हैं.

उत्तर प्रदेश के एक सैंड आर्टिस्ट ने रेत पर उनकी आकृति उकेरकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. यह सैंड आर्ट सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है और समर्थक इसे भरत तिवारी के प्रति लोगों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बता रहे हैं. एक ओर समर्थक हर हाल में स्मारक निर्माण पूरा कराने की बात कह रहे हैं, वहीं प्रशासन सरकारी भूमि पर बिना अनुमति निर्माण नहीं होने देने की बात पर अडिग है. ऐसे में स्मारक निर्माण को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में प्रशासन के अगले कदम और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं.

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