भरत तिवारी एनकाउंटर: FIR के महज 7 दिन बाद पोस्टिंग, आरोपी SDOP राजेश शर्मा को मिला नया पद
TV9 Bharatvarsh July 02, 2026 12:43 AM

Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नामजद आरोपी बनाए गए तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDOP) राजेश कुमार शर्मा को FIR दर्ज होने के महज सात दिन बाद ही नई पोस्टिंग दे दी गई है. गृह विभाग द्वारा जारी तबादला सूची में उन्हें पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना में तैनात किया गया है. इस फैसले के बाद सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.

FIR के बाद किया गया था लाइन हाजिर

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पुलिस अधिकारियों पर हत्या का आरोप लगाया था. सरकार के निर्देश पर शाहपुर थाने में तत्कालीन जगदीशपुर SDOP राजेश कुमार शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

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FIR दर्ज होने के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए SDOP राजेश कुमार शर्मा को उनके पद से हटाकर बिहार पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया था. साथ ही उन्हें पुलिस मुख्यालय में योगदान देने का निर्देश दिया गया था.

53 डीएसपी के तबादले में मिली नई जिम्मेदारी

गृह विभाग ने हाल ही में बिहार पुलिस के 53 डीएसपी का तबादला किया. इसी सूची में राजेश कुमार शर्मा को पुलिस उपाधीक्षक, मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, पटना में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर पंकज कुमार मिश्रा की नियुक्ति की गई है.

बता दें कि राजेश कुमार शर्मा सारण जिले के निवासी हैं और इंस्पेक्टर से पदोन्नत होकर 2019 बैच में डीएसपी बने थे. वे पिछले कुछ समय से भोजपुर के जगदीशपुर अनुमंडल में SDOP के पद पर कार्यरत थे.

पोस्टिंग पर उठ रहे हैं सवाल

SDOP राजेश कुमार शर्मा के खिलाफ हत्या की नामजद प्राथमिकी दर्ज होने और मामले की जांच जारी रहने के बावजूद नई पोस्टिंग दिए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. भरत तिवारी के परिजनों का कहना है कि जिस अधिकारी पर हत्या जैसा गंभीर आरोप हो और जिसके खिलाफ जांच चल रही हो, उसे इतने कम समय में दूसरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना उचित नहीं है.

परिजनों का आरोप है कि इससे निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं. उनका कहना है कि उन्हें अब भी पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है और वे मामले में निष्पक्ष जांच तथा न्याय की मांग कर रहे हैं.

एनकाउंटर के बाद बढ़ा था विवाद

भरत तिवारी एनकाउंटर उस समय विवादों में आ गया था, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई. इसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर सवाल उठाए. बढ़ते विवाद के बीच भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को निलंबित कर दिया था. साथ ही डीएसपी राजेश कुमार शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया.

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