खट्टे फलों का बादशाह चकोतरा, स्वाद और पोषण दोनों में लाजवाब
Indias News Hindi July 02, 2026 01:42 PM

New Delhi, 2 जुलाई . चकोतरा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में साइट्रस मैक्सिमा कहा जाता है, खट्टे फलों की श्रेणी में सबसे बड़ा और खास फल माना जाता है. इसे अंग्रेजी में पोमेलो भी कहते हैं. यह फल जितना बड़ा होता है, उतना ही सेहत के लिए फायदेमंद भी होता है. अपनी खास बनावट, रसीले गूदे और पोषक तत्वों की वजह से इसे ‘खट्टे फलों का बादशाह’ भी कहा जाता है.

चकोतरे एक सदाबहार पेड़ होता है और आमतौर पर 5 से 15 मीटर तक ऊंचा हो सकता है. इसकी पत्तियां हरी और चमकदार होती हैं और इसमें सुगंधित फूल भी लगते हैं, जिनका उपयोग इत्र बनाने में किया जाता है. इसका फल आकार में बहुत बड़ा होता है और कभी-कभी इसका वजन 2 किलो तक भी पहुंच जाता है. यह फल गोल या नाशपाती के आकार का होता है और पकने पर इसका रंग पीला, नारंगी या हल्का लाल हो सकता है.

चकोतरे का छिलका काफी मोटा और स्पंजी होता है, जिसे छीलना थोड़ा मेहनत का काम लगता है, लेकिन अंदर का हिस्सा बेहद रसीला और स्वादिष्ट होता है. इसका गूदा बड़े-बड़े टुकड़ों में होता है, जो हल्का मीठा और हल्का खट्टा स्वाद देता है. कुछ किस्मों में हल्की कड़वाहट भी महसूस हो सकती है.

पोषण के लिहाज से चकोतरा किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाता है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है. इसके अलावा, इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को अंदर से साफ रखने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में सहायक होते हैं.

चकोतरे का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है. लोग इसे खांसी, बुखार और पेट की समस्याओं में फायदेमंद मानते हैं. इसे ताजे फल के रूप में खाया जाता है, साथ ही इसका जूस भी काफी पसंद किया जाता है.

पीआईएम/डीकेपी

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