ईरान जंग के बाद बदल रहा दुबई, यूएई में अपना दबदबा कैसे बढ़ा रहे हैं भारतीय?
TV9 Bharatvarsh July 03, 2026 02:43 PM

दुबई लंबे समय से भारतीयों के लिए नौकरी और कारोबार का बड़ा केंद्र रहा है, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. पहले जहां भारतीय दुबई में काम करने या बिजनेस शुरू करने जाते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में वहां घर और जमीन खरीद रहे हैं. पिछले कुछ सालों में दुबई का रियल एस्टेट बाजार लगातार तेजी से बढ़ा, लेकिन अब पांच साल की रिकॉर्ड रैली के बाद बाजार में थोड़ी नरमी आने लगी है.

इसी बीच ईरान-इजराइल तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता ने इनवेस्टर्स की रणनीति बदल दी है. ऐसे समय में भारतीय इनवेस्टर्स ने इसे मौका मानते हुए दुबई की प्रॉपर्टी में निवेश बढ़ा दिया है. कम टैक्स, बेहतर रिटर्न, मजबूत कानूनी व्यवस्था और गोल्डन वीजा जैसी सुविधाएं भी भारतीयों को अट्रैक्ट कर रही हैं.

आज भारतीय सिर्फ दुबई में घर खरीदने वाले विदेशी नागरिक नहीं रह गए हैं, बल्कि वे वहां के सबसे बड़े विदेशी प्रॉपर्टी खरीदार बन चुके हैं. माना जा रहा है कि अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले सालों में दुबई के प्रॉपर्टी बाजार पर भारतीयों का आर्थिक प्रभाव और मजबूत होगा.

अलग-अलग रिपोर्टें बताती हैं कि विदेशी खरीदारों में भारतीय सबसे आगे हैं और हर साल अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं. इससे भारतीय निवेशकों की आर्थिक ताकत के साथ-साथ यूएई में उनकी मौजूदगी भी लगातार बढ़ रही है.

5 बड़ी बातें
  • भारतीय लगातार दूसरे साल दुबई में सबसे बड़े विदेशी प्रॉपर्टी खरीदार बने हैं.
  • पांच साल की तेजी के बाद दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में कीमतों की रफ्तार धीमी पड़ रही है.
  • ईरान-इजराइल तनाव के बीच कई निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर दुबई को चुना है.
  • गोल्डन वीजा और टैक्स में राहत भारतीय निवेशकों को आकर्षित कर रही है.
  • विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में भारतीयों का निवेश और बढ़ सकता है.
क्यों ठंडा पड़ रहा है दुबई का प्रॉपर्टी बाजार?

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. इस दौरान कई इलाकों में घरों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गईं. अब बाजार में नए प्रोजेक्ट्स तेजी से आ रहे हैं, जिससे सप्लाई बढ़ रही है. इसी वजह से कीमतों में पहले जैसी तेज बढ़ोतरी नहीं हो रही. कई जगहों पर खरीदारों के लिए बेहतर डील भी मिलने लगी है. कई लोग इसे बाजार में गिरावट नहीं, बल्कि सामान्य स्थिति में लौटना मान रहे हैं. जहां पहले सालाना 17-18% तक बढ़ोतरी हो रही थी, अब यह घटकर करीब 4-5% रह गई है.

भारतीय क्यों खरीद रहे हैं दुबई में प्रॉपर्टी?

दुबई में भारतीयों की दिलचस्पी कई वजहों से बढ़ रही है. पहली वजह है कि वहां किराये से अच्छा रिटर्न मिलता है. दूसरी वजह है कि यूएई में व्यक्तिगत आयकर (Income Tax) नहीं लगता. तीसरी वजह गोल्डन वीजा है, जिसके जरिए बड़ी रकम का निवेश करने वालों को लंबे समय तक रहने की सुविधा मिल सकती है. इसके अलावा दुबई की मजबूत अर्थव्यवस्था, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित निवेश माहौल भी भारतीयों को आकर्षित कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, भारतीयों ने करीब 85,000 करोड़ से 95,000 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी खरीदी है.

भारतीयों का कितना बढ़ा निवेश?

भारतीय अब दुबई के सबसे बड़े विदेशी खरीदार हैं. Knight Frank और अन्य प्रॉपर्टी सलाहकार कंपनियों की रिपोर्ट बताती हैं कि भारतीय निवेशकों ने पिछले कुछ सालों में अरबों डॉलर की प्रॉपर्टी खरीदी है. खासकर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे शहरों के हाई नेटवर्थ निवेशक दुबई में लग्जरी अपार्टमेंट और विला खरीद रहे हैं. इसके अलावा कई मिडिल क्लास फैमिली भी भविष्य को देखते हुए वहां फ्लैट खरीद रहे हैं.

ईरान तनाव का क्या असर पड़ा?

ईरान-इजराइल तनाव के दौरान पश्चिम एशिया में अनिश्चितता जरूर बढ़ी, लेकिन दुबई ने खुद को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश केंद्र के रूप में बनाए रखा. कई वैश्विक निवेशकों ने जोखिम वाले क्षेत्रों की बजाय यूएई में निवेश बढ़ाया. हालांकि कुछ समय के लिए बाजार की रफ्तार धीमी हुई, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में दुबई की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि भारतीय निवेशकों ने भी इस दौरान खरीदारी जारी रखी.

क्या भारतीय और ताकतवर होंगे?

रियल एस्टेट सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि एक बड़ा निवेश भी है. अगर भारतीय इसी तरह दुबई में निवेश बढ़ाते रहे तो वहां उनकी आर्थिक मौजूदगी और मजबूत होगी. इससे भारतीय कारोबारियों, निवेशकों और एनआरआई समुदाय का प्रभाव भी बढ़ेगा. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि भारतीयों का दुबई की कितनी प्रॉपर्टी पर कब्जा है, क्योंकि इसका कोई आधिकारिक डेटा नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि विदेशी खरीदारों में भारतीय सबसे आगे हैं और हर साल उनकी हिस्सेदारी बढ़ रही है.

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