Kundali’s Paap Kartari Yoga: ज्योतिष शास्त्र में कई शुभ और अशुभ योगों के बारे में विस्तार से बताया गया है, जिनका अच्छा बुरा प्रभाव व्यक्ति के जीवन में देखने को मिलता है. इन्हीं में शामिल है पाप कर्तरी योग. ये एक अशुभ योग माना जाता है. जिस भी जातक की कुंडली में ये योग बनता है, उसको जीवन में अशुभ फल मिलते हैं. जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं. कई तरह की मुश्किलें जीवन को घर लेती हैं.
इस योग से कुंडली का जो ग्रह या भाव प्रभावित होता है, उसका फल प्राप्त करने में व्यक्ति को परेशानियां आती हैं. ऐसे में आइए ज्योतिष के अनुसार जानते हैं कि पाप कर्तरी योग कुंडली में कब बनता है?
कुंडली में कब बनता है पाप कर्तरी योग?कर्तरी का अर्थ होता है कैंची. इसलिए पाप कर्तरी योग का निर्माण जातक की कुंडली में जब भी होता है, ये ग्रह या भाव के शुभ फलों को काट देता है. ज्योतिषविदों के अनुसार, पाप कर्तरी योग की स्थिति कुंडली में तब बनती है, जब कोई भाव या ग्रह क्रूर ग्रहों शनि, राहु, केतु या फिर मंगल और सूर्य के बीच फंस जाता है. इन ग्रहों के बीच जो भी भाव या ग्रह फंसा होता है, उसके अशुभ फल व्यक्ति को प्राप्त होने लगते हैं.
उदाहरण के तौर पर अगर इन ग्रहों के बीच में गुरु आ जाते हैं, तो उनसे जुड़े अशुभ फल व्यक्ति को मिलने लगते हैं. वहीं अगर इन ग्रहों के बीच में कुंडली का दंसवा भाव फंस जाता है, तो व्यक्ति को करियर से संबंधित परेशानियां होना शुरू हो जाती हैं, क्योंकि कुंडली का दसवां भाव करियर से जुड़ा होता है.
पाप कर्तरी योग के उपायगायत्री मंत्र का निरंतर जप, माता दुर्गा की उपासना करने और दुर्गा सप्तशती का पाठ और हनुमान चालीसा का पाठ करने से पाप कर्तरी योग के बुरे प्रभावों को समाप्त किया जा सकता है. इसके अलावा पाप कर्तरी योग जिस भाव या ग्रह को प्रभावित करे, ज्योतिषविद की सलाह पर उससे जुड़े उपाय करने चाहिए.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.