ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम विदाई समारोह शनिवार (4 जुलाई) से शुरू होगा, जिसे लेकर दुनियाभर से नेताओं का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचना शुरू हो गया है. खामेनेई के ताबूत को तेहरान के ग्रैंड मोसाला में एक स्टेज पर रखा गया है. सबसे खास बात ये है कि पूर्व सुप्रीम लीडर के ताबूत पर उनके पैतृक शहर मशहद में मौजूद इमाम रजा दरगाह का रेड फ्लैग (लाल झंडा) रखा गया है.
जानकारों का कहना है कि खामेनेई के ताबूत पर इस लाल झंडे का मतलब है कि ईरान अपने सुप्रीम लीडर की मौत की तुलना कर्बला की शहादत से कर रहा है. अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्ट और इस्लामिक राजनीति के प्रोफेसर नादेर हाशमी ने अल जजीरा को बताया कि लाल झंडा पैगंबर मोहम्मद के नवासे हुसैन के बलिदान का प्रतीक है.
कर्बला की लड़ाई, जो 7वीं सदी में हुई थी उस दौरान हुसैन की हत्या कर दी गई थी और शिया इस्लाम में उन्हें बहुत सम्मान दिया जाता है. उन्हें दूसरा इमाम कहा जाता है. उन्होंने आगे बताया कि कर्बला की लड़ाई में हुसैन की शहादत शिया मुसलमानों के लिए नैतिकता का एक अहम उदाहरण मानी जाती है. इसलिए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान अमेरिका और इजरायल के हमले में मारे गए अपने सर्वोच्च नेता की मौत की तुलना उनसे करने की कोशिश कर रहा है.
काले और लाल झंडे का क्या है मतलब
तेहरान में जहां अयातुल्ला अली खामेनेई के ताबूत को रखा गया है, उस जगह को काले और लाल रंग के बैनरों और खामेनेई की तस्वीरों से सजाया गया है. बता दें कि शिया इस्लाम में काले झंडे को शोक और लाल झंडे को बदले की भावना से जोड़कर देखा जाता है.
अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलेंगे. इसके अलावा उनके अंतिम संस्कार जुलूस को इराक के भी कई शहरों में घुमाया जाएगा. इस्लामिक रिपब्लिक का ऐसा करने का मकसद अली खामेनेई को शिया इस्लाम में सर्वमान्य नेता बनाने की कोशिश माना जा रहा है. इन सबके बाद खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा.