जबलपुर में कुत्ते, बंदर और बिल्लियों का आतंक! रोज 50 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे अस्पताल, निगम पर उठे सवाल
TV9 Bharatvarsh July 06, 2026 05:43 PM

बारिश का मौसम शुरू होते ही जबलपुर में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. शहर की सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में घूम रहे आवारा कुत्तों के हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हालत यह है कि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 50 से अधिक डॉग बाइट के मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं. वैक्सीनेशन कक्ष के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं.

जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि जून महीने से अब तक एंटी रैबीज के कुल 2,425 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा 555 मामले डॉग बाइट के हैं. इसके अलावा बंदर के काटने के 87 और बिल्ली के काटने के 17 मामले भी सामने आए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि बारिश के दौरान आवारा जानवरों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, जिससे लोगों पर हमले की घटनाओं में भी इजाफा देखने को मिलता है.

किन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा?

जबलपुर शहर के सिविक सेंटर, रसल चौक, धन्वंतरि नगर, गढ़ा, मदन महल, रानीताल, गोहलपुर, गाजी नगर, अमखेरा, रद्दी चौकी, चार खंभा, घमापुर, रांझी समेत कई इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों से सबसे ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय गलियों और सड़कों पर आवारा कुत्तों के झुंड घूमते हैं, जिससे राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है. कई इलाकों में लोग शाम ढलने के बाद घर से निकलने से भी डरने लगे हैं.

आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर नगर निगम लगातार अभियान चलाने का दावा करता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा. हालांकि, हाल ही में खतरनाक और बीमार आवारा श्वानों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने नई कार्ययोजना पर काम शुरू किया है.

वहीं, नगर निगम प्रशासन आवारा श्वानों के लिए शेल्टर होम बनाने की दिशा में पहल करने की बात कर रहा है. इसके लिए उपयुक्त जमीन की तलाश लगभग पूरी कर ली गई है.

बढ़ाई गई पिंजरों की संख्या

इस बीच कठौंदा स्थित डॉग बधियाकरण केंद्र में पिंजरों की संख्या 65 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है. निगम का दावा है कि जल्द ही 100 और पिंजरे बढ़ाए जाएंगे. यहां प्रतिदिन 30 से 35 आवारा कुत्तों का बधियाकरण किया जा रहा है. ऑपरेशन के बाद उन्हें कुछ दिनों तक निगरानी में रखकर वापस छोड़ा जाता है.

नगर निगम के पास अभी तक शहर में आवारा कुत्तों की आधिकारिक गणना नहीं है, लेकिन अनुमान है कि जबलपुर में 40 हजार से अधिक आवारा श्वान हैं. इनमें कितने रैबीज से संक्रमित या आक्रामक हैं, इसका कोई सटीक रिकॉर्ड निगम के पास मौजूद नहीं है. यही वजह है कि लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है.

बारिश के मौसम में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग, दोनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब लोगों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तैयार की जा रही नई कार्ययोजना पर टिकी है, ताकि शहर को आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से राहत मिल सके.

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