ई-रिक्शा को मोबाइल ऐप से हैक करने के बाद अब मोबाइल ऐप के जरिए ही वीडियो में ATM Machine को भी हैक करने का दावा किया गया है. वायरल हो रही वीडियो में जो दावा किया गया है उसने हम सभी की आंखें खोल दी हैं और सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है? ऐसा मुमकिन तो नहीं लगता है क्योंकि एटीएम मशीन काफी सिक्योर होती है लेकिन यूएस में अब तक कई ऐसे मामले आए हैं जिनमें हैकर्स ने एटीएम को हैक कर, पैसा निकाला है. अभी फिलहाल इस तरह का कोई मामला भारत में तो नहीं आया है, यूएस में हुए इस तरह के मामले को ATM Jackpotting नाम दिया गया है. ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि ATM Jackpotting क्या है और किस तरह से हैकर्स पूरा खेल रचते और पैसे निकालते हैं?
ATM जैकपॉटिंग कैसे काम करता है?इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, यूएस में सामने आए मामलों से पता चला है कि हैकर्स ATM मशीन में मैलवेयर डाल देते हैं. यह मैलवेयर ATM के उस सॉफ्टवेयर को इंफ्केट करता है जो उसकी फिजिकल ऑपरेशन को कंट्रोल करता है. आम तौर पर, ATM कैश देने से पहले बैंक से मंजूरी के लिए निर्देश भेजते हैं लेकिन हैकर्स बैंक की मंजूरी लिए बिना ही अपने कमांड भेज देते हैं. इससे वह बिना किसी कार्ड, अकाउंट या बैंक सर्वर से अप्रूवल मिले बिना ही कैश निकाल लेते हैं.
यह मैलवेयर अपराधियों को ATM मशीन का सीधा कंट्रोल दे देता है. खास बात यह है कि यह हमला सीधे ATM पर होता है, न कि कस्टमर के बैंक अकाउंट पर. USA टुडे के अनुसार, एक तरीका यह है कि वह ATM की हार्ड ड्राइव निकालकर उसे कंप्यूटर से जोड़ते हैं, मैलवेयर कॉपी करते हैं और फिर उसे वापस लगा देते हैं. दूसरा तरीका यह है कि वह असली हार्ड ड्राइव को एक नई संक्रमित हार्ड ड्राइव से बदल देते हैं और ATM को रीस्टार्ट कर देते हैं.
आसान भाषा में समझें तो फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (FBI) के अनुसार, ATM जैकपॉटिंग एक साइबर क्राइम है जिसमें हैकर्स मैलवेयर का इस्तेमाल कर ATM मशीनों को कंट्रोल करते हैं और बिना किसी बैंक कार्ड के कैश निकाल लेते हैं.
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