कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में दिखा ग्रेटर पेंटेड-स्नाइप का परिवार, पक्षी पिता करता है चूजों की परवरिश
TV9 Bharatvarsh July 10, 2026 03:43 AM

Nainital Corbett Tiger Reserve: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उसके लैंडस्केप से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बेहद अहम और दुर्लभ रिकॉर्ड सामने आया है. पहली बार ग्रेटर पेंटेड-स्नाइप पक्षी अपने दो चूजों के साथ कैमरे में कैद हुआ है. यह सिर्फ एक दुर्लभ फोटो या वीडियो नहीं, बल्कि कोसी नदी क्षेत्र में इस पक्षी के सफल प्रजनन का पहला वैज्ञानिक प्रमाण माना जा रहा है. खास बात यह है कि इस प्रजाति में बच्चों की पूरी जिम्मेदारी पिता निभाता है और उसी अनोखे दृश्य को प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने अपने कैमरे में रिकॉर्ड किया है.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के लैंडस्केप से बहने वाली कोसी नदी के रिंगोड़ा क्षेत्र के वेट एरिया में एक ऐसा दृश्य कैमरे में कैद हुआ है, जिसने पक्षी विशेषज्ञों और वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने पहली बार दुर्लभ ग्रेटर पेंटेड-स्नाइप के नर पक्षी को अपने दो नन्हे चूजों के साथ रिकॉर्ड किया है.

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यह रिकॉर्ड इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक इस पक्षी को केवल देखने के दावे होते रहे थे, लेकिन पहली बार फोटो और वीडियो साक्ष्य के साथ यह साबित हुआ है कि ग्रेटर पेंटेड-स्नाइप ने कोसी नदी के किनारे कॉर्बेट लैंडस्केप में घोंसला बनाया, अंडे दिए और सफलतापूर्वक बच्चों को जन्म दिया. पक्षी विज्ञान की भाषा में इसे ‘कन्फर्म्ड ब्रीडर’ (Confirmed Breeder) कहा जाता है, जो किसी पक्षी के सामान्य दिखने की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण और वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है.

दीप रजवार का कहना है कि यह रिकॉर्ड उत्तराखंड की जैव विविधता के लिए बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने बताया कि इस प्रजाति में प्रकृति का एक बेहद अनोखा नियम देखने को मिलता है. मादा अंडे देने के बाद घोंसला छोड़ देती है, जबकि नर पक्षी अकेले ही अंडों की देखभाल करता है, बच्चों को बाहर निकालता है और फिर उनकी पूरी परवरिश करता है.

उन्होंने बताया कि खतरा महसूस होने पर यही पिता अपने चूजों को पंखों के नीचे छिपाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाता है. कैमरे में कैद हुए फोटो और वीडियो इसी अनोखे पैरेंटल केयर का दुर्लभ दस्तावेज हैं. वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार का दावा है कि कॉर्बेट और इसके लैंडस्केप में इस व्यवहार का यह पहला प्रमाणित फोटो और वीडियो रिकॉर्ड है.

उनका कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक दुर्लभ पक्षी की तस्वीर नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि कॉर्बेट का प्राकृतिक तंत्र आज भी संवेदनशील प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध करा रहा है. कोसी नदी के वेटलैंड, घास के मैदान और प्राकृतिक संरक्षण प्रयास इस सफलता के पीछे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

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उधर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने भी इस रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ग्रेटर पेंटेड स्नाइप कॉर्बेट लैंडस्केप में स्वाभाविक रूप से पाई जाती है. यह मुख्य रूप से छोटे-छोटे घास वाले ग्रासलैंड और वेटलैंड क्षेत्रों में रहती है. इसकी आदत घास के बीच छिपे रहने की होती है. इसलिए यह सामान्यतः लोगों की नजर में कम आती है.

उनका मानना है कि इस तरह का प्रमाण भविष्य में कॉर्बेट क्षेत्र के वेटलैंड संरक्षण और पक्षी विविधता के अध्ययन के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा. यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि यदि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहें तो दुर्लभ प्रजातियां न केवल यहां मौजूद रहती हैं, बल्कि सफलतापूर्वक प्रजनन भी करती हैं.

बाघों की धरती के रूप में दुनिया भर में पहचान रखने वाले कॉर्बेट ने अब पक्षी संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नया इतिहास रच दिया है. ग्रेटर पेंटेड-स्नाइप का यह पहला फोटो और वीडियो आधारित ब्रीडिंग रिकॉर्ड केवल एक दुर्लभ दृश्य नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता, सुरक्षित वेटलैंड और सफल संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है. यह रिकॉर्ड आने वाले वर्षों में पक्षी विज्ञान और संरक्षण अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाएगा.

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