रात को देर तक मोबाइल चलाना, काम का बढ़ता दबाव, तनाव और अनियमित दिनचर्या अब सिर्फ लोगों की आदतें नहीं रह गई हैं, बल्कि उनकी सेहत पर भी भारी पड़ने लगी हैं. कभी ऑफिस का काम, कभी सोशल मीडिया और कभी देर रात तक ओटीटी देखने की वजह से लोगों की नींद लगातार कम होती जा रही है. इसका असर अब सिर्फ सुबह की थकान तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर और दिमाग दोनों पर दिखने लगा है. यही वजह है कि डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार अच्छी नींद को संतुलित आहार और नियमित व्यायाम जितना ही जरूरी बता रहे हैं.
अब इस चिंता को एक नई रिसर्च ने भी आंकड़ों के साथ सामने रखा है. रिसर्च के मुताबिक, भारत में हर दो में से एक व्यक्ति (51.4%) किसी न किसी तरह की नींद से जुड़ी समस्या का सामना कर रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ज्यादातर भारतीय औसतन सिर्फ 5.77 घंटे ही सो पा रहे हैं, जबकि जानकारों ने वयस्कों के लिए रोज 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी है. रिसर्च में ये भी पाया गया कि लोगों को सोने में औसतन 28 मिनट लगते हैं और उनकी नींद की गुणवत्ता भी सामान्य से कम है. यानी कई लोग बिस्तर पर तो समय से चले जाते हैं, लेकिन गहरी और सुकूनभरी नींद नहीं ले पाते.
हो सकती है कई बिमारीरिसर्च में ये भी बताया गया है कि लंबे समय तक नींद पूरी न होने का असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर पड़ता है. इससे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, दिल की बीमारियां, तनाव, डिप्रेशन, कमजोर इम्यूनिटी और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर को खुद को ठीक करने और दिमाग को आराम देने का समय भी नहीं मिल पाता. यही वजह है कि लगातार नींद की कमी कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत बन सकती है.
नींद पर बड़ा हेल्थ अलर्टपल्मोनोलॉजिस्ट और इंटरनेशनल स्लीप स्पेशलिस्ट डॉक्टर नलिनी नागल्ला की रिपोर्ट देखें, तो उन्होंने हैदराबाद के 500 आईटी कर्मचारियों पर एक सर्वे किया था. जिसमें उन्होंने पाया गया कि 97% लोग सोने से पहले कम से कम एक घंटे तक मोबाइल या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट इस्तेमाल करते हैं, 62% लोगों को नींद आने या नींद बनाए रखने में दिक्कत होती है, 38% लोग दिनभर थकान, ध्यान की कमी या खराब मूड से परेशान रहते हैं, जबकि 22% लोगों में स्लीप एपनिया के लक्षण मिले.
क्या करें, क्या न करें?आज के समय में देर रात तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, बढ़ता स्क्रीन टाइम, काम का दबाव, तनाव और अनियमित लाइफस्टाइल लोगों की नींद के सबसे बड़े दुश्मन बन गए हैं. ऐसे में हर दिन एक तय समय पर सोना और उठना, सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाना, शाम के बाद कैफीन कम लेना और शांत माहौल में सोने की आदत डालना काफी मददगार हो सकता है. अच्छी नींद अब केवल आराम का नहीं, बल्कि अच्छी सेहत, बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और लंबी उम्र का भी आधार मानी जा रही है. इसलिए, अगर नींद लगातार कम हो रही है या लंबे समय से नींद से जुड़ी परेशानी बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.