विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा गुरुवार (16 जुलाई) से शुरू हो रही है. पुरी नगरी 'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गूंज रही है. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शन के लिए इस पवित्र शहर में पहुंच चुके हैं, लेकिन इस बार आस्था के इस महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन से ज्यादा रहने और रुकने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. पुरी में होटलों और धर्मशालाओं के हालात ऐसे हो गए हैं कि आम भक्तों के बजट का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है.
6 महीने पहले ही बुक हो गए थे होटल
इस साल रथ यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुरी के लगभग 95% होटल, गेस्ट हाउस और लॉज करीब 6 महीने पहले ही पूरी तरह बुक हो चुके थे. जिन लोगों ने समय रहते बुकिंग नहीं कराई थी, वे अब एक अदद कमरे के लिए भटक रहे हैं. शहर के सभी प्रमुख इलाकों जैसे ग्रैंड रोड, सी-बीच और मंदिर के आसपास के इलाकों में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है.
बेसिक लॉज के दाम ₹50000 के पार
पुरी में इस समय रुकने का संकट इतना बढ़ गया है कि होटल और लॉज मालिकों ने मनमाने दाम वसूलना शुरू कर दिया है. बेसिक लॉज या सामान्य कमरे आम दिनों में ₹1500 से ₹3000 रुपये प्रति रात में मिल जाते थे, उनका किराया इस समय 50000 रुपये प्रति रात को भी पार कर गया है.
वहीं, ग्रैंड रोड पर स्थित कुछ लॉज, जहां की खिड़कियों या बालकनी से सीधे रथ यात्रा के दर्शन होते हैं, वहां के कमरों की कीमत ₹1 लाख से ₹1.5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है. मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए शहर में ठहरना नामुमकिन हो गया है. हालात को देखते हुए तमाम श्रद्धालु रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और समुद्र के किनारे खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं.
प्रशासन की तैयारी और टेंट सिटी का इंतजाम
भीड़ और होटलों की इस मनमानी को देखते हुए ओडिशा सरकार और पुरी जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए कई अस्थायी इंतजाम किए हैं.
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