UMEED पोर्टल क्या है? 7.99 लाख वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार, बिहार में 574 पर अवैध कब्जा
TV9 Bharatvarsh July 28, 2026 11:43 PM

वक्फ संशोधन कानून लागू होने के बाद देशभर में वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से UMEED यानी यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट एमपावरमेंट, इफिशियेंसी एंड डेवलपमेंट पोर्टल भी शुरू किया गया है. इस पोर्टल पर देशभर की वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है. ऐसा करने वक्फ संपत्तियों के सही संख्या, स्थिति और स्वामित्तव का रिकॉर्ड तैयार हो पाएगा.

राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में 27 जुलाई 2026 को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि 21 जुलाई 2026 तक देशभर में 7.99 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड UMEED पोर्टल पर दर्ज किया गया. इस दौरान उन्होंने बिहार में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की 574 संपत्तियों पर अवैध कब्जे की जानकारी भी संसद दी.

क्या है UMEED पोर्टल?

UMEED पोर्टल वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और प्रबंधन के लिए बनाया गया एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है. इसमें सभी वक्फ संपत्तियों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है. इससे यह पता चलेगा किस राज्य में कितनी वक्फ संपत्तिया हैं, उनका रिकॉर्ड कितना अपडेट हैं. कितनी संपत्तियों पर विवाद या कब्जे की स्थिति है.

वक्फ संपत्तियों का डेटा कैसे अपलोड होता है?
  • सबसे पहले UMEED पोर्टल पर जाकर मेकर संपत्ति का डिटेल दर्ज करता है.
  • फिर चेकर उन संपत्तियों की डिटेल और डॉक्यूमेंट की जांच करता है.
  • सब कुछ सही होने पर अप्रूवर अंतिम मंजूरी देता है.
  • इसके बाद रिकॉर्ड पोर्टल पर स्वीकृत माना जाता है.

UMEED पोर्टल पर मेकर यानी डेटा भरने वाला, जो संपत्तियों के डिटेल को यहां दर्ज करता है. वहीं, चेकर यानी, जो कर्मचारी संपत्तियों की जांच करता है. वहीं, अप्रूवर यानी संपत्ति की असल स्थिति की अंतिम मंजूरी देने वाला अधिकारी.

UMEED पोर्टल पर अब तक कितनी वक्फ संपत्तियां दर्ज हुईं?

सरकार के अनुसार 21 जुलाई 2026 तक UMEED पोर्टल पर कुल 7,99,027 वक्फ संपत्तियों की एंट्री हुई. इनमें 6,17,192 संपत्तियों को फाइनल स्तर पर अप्रूव किया जा चुका है. वहीं, 1,81,835 संपत्तियों का अब भी रिकॉर्डमेकर, चेकर और अप्रूवर स्तर पर लंबित हैं.

सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियां किस राज्य में?
  • यूपी(शिया+सुन्नी) : 160870
  • पश्चिम बंगाल: 1,32,395
  • उत्तर प्रदेश: 1,52,695
  • केरल: 79,905
  • महाराष्ट्र: 71,922
  • तेलंगाना: 63,984
  • कर्नाटक: 58,845
क्यो बढ़ाई गई थी UMEED पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड को अपलोड करने की समय सीमा?

वक्फ (संशोधन) कानून के लागू होने के बाद सभी राज्य वक्फ बोर्डों को 6 महीने के भीतर अपनी सभी वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड UMEED पोर्टल पर अपलोड करना था. लेकिन कई राज्य तय समय सीमा में यह काम पूरा नहीं कर पाए। इसके पीछे रिकॉर्ड अधूरे होना, पुराने दस्तावेज, जमीन संबंधी विवाद, स्टाफ की कमी या तकनीकी दिक्कतें जैसी वजहें थीं.. इसके बाद संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनल या हाईकोर्ट ने पर्याप्त कारण मिलने पर समय-सीमा बढ़ा दी.

UMEED Act, 1995 की धारा 32 के अनुसार किसी राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी उस राज्य की ही होती है. अगर वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा हो जाता है तो धारा 54 के तहत उसे हटाने की कार्रवाई राज्य वक्फ बोर्ड ही करता है.

बिहार में वक्फ संपत्तियों की क्या स्थिति है?

बिहार में दो वक्फ बोर्ड हैं. शिया और सुन्नी. सरकार द्वारा दिए गए आंकड़े के मुताबिक शिया वक्फ बोर्ड की कुल 6,312 संपत्तियों का डिटेल UMEED पोर्टल पर डाला गया. इसमें से 5,955 संपत्तियों को अप्रूवल मिल चुका है. वहीं, बिहार सुन्नी वक्फ बोर्ड की कुल 11,454 संपत्तियां UMEED पोर्टल पर रजिस्टर किया गया. इसमें 6,700 को अप्रूवल मिला.

संसद में सरकार ने यह भी बताया कि बिहार शिया वक्फ बोर्ड की 63 और सुन्नी वक्फ बोर्ड की 511 संपत्तियां अवैध कब्जे में हैं. यानी बिहार में कुल 574 वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे में है. बिहार के दोनों वक्फ बोर्डो ने धारा 54 के तहत कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है

UMEED पोर्टल क्यों अहम है?
  • सभी वक्फ संपत्तियों का केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार होगा
  • फर्जी दावों और रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना कम होगी
  • अतिक्रमण और अवैध कब्जे की पहचान आसान होगी
  • अदालतों और वक्फ बोर्डों को विवाद निपटाने में मदद मिलेगी
  • संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी
वक्फ संपत्तियों पर इन आरोपों से मिलेगा छुटकारा

कई सालों से वक्फ संपत्तियों को लेकर रिकॉर्ड में गड़बड़ी, दोहरे दावे, अतिक्रमण और पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप लगते रहे हैं. अब UMEED पोर्टल पर इन सपंत्तियों के डिजिटल रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद इससे संबंधित विवादों का निपटान करने में आसानी हो सकता है. साथ ही इन संपत्तियों पर कोई आसानी से अवैध तरीके से कब्जा भी नहीं कर सकता है. इन संपत्तियों के रिकॉर्ड डिजिटल मौजूद होने से इनकी पारदर्शिता को भी बढ़ावा मिलेगा.

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