श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को बताया कि सरकार गिग कर्मियों के अधिकारों की रक्षा के लिए श्रम संहिता के नियमों को लागू करेगी और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि भारत में गिग कर्मी एक नई और विकसित होती व्यवस्था का हिस्सा हैं। मांडविया ने यह भी बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 80 लाख गिग कर्मी हैं, जिनमें से करीब 10 लाख ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि श्रम संहिता के अंतर्गत गिग कर्मियों को मान्यता दी गई है और उन्हें कानूनी दर्जा प्रदान किया गया है, जो उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए सरकार की कोशिशों का हिस्सा है। गिग कर्मी ऐसे व्यक्ति होते हैं जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंधों से बाहर रहकर काम करते हैं और विभिन्न कार्यों के माध्यम से आय अर्जित करते हैं। मांडविया ने कहा कि सरकार ने गिग कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए आवश्यक प्रावधान किए हैं।
उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि श्रम संहिता में गिग कर्मियों के हितों की सुरक्षा के लिए जो प्रावधान किए गए हैं, उन्हें लागू करके उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। मोदी सरकार के तहत, लगभग 101 करोड़ लोग विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में आते हैं। एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में, मांडविया ने बताया कि श्रम भारत के संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में श्रम कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि श्रम संहिता के तहत, केंद्र और राज्य सरकारें श्रमिकों के हितों की रक्षा और कानूनी प्रावधानों के पालन के लिए उचित कदम उठाती हैं। श्रम संहिता में श्रमिकों को मिलने वाली सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।