ऋषि पंचमी 15 या 16 सितंबर कब ? इस दिन देवी-देवता की बजाय ऋषियों की पूजा क्यों होती है
जागृति सोनी बरसले September 12, 2026 11:12 PM

Rishi Panchami 2026: ऋषि पञ्चमी कोई त्यौहार नहीं है, अपितु सप्त ऋषियों अर्थात सात ऋषियों को श्रद्धाञ्जलि देने और रजस्वला दोष से शुद्ध होने के लिए स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला व्रत है. आज के दौर में भी कई क्षेत्रों और परिवारों में मासिक धर्म के समय महिलाओं को भोजन पकाने, किसी भी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने और परिवार के किसी भी सदस्य को छूने की अनुमति नहीं होती है.

धार्मिक मान्यता है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन न करने से रजस्वला दोष लगता है. रजस्वला दोष से मुक्ति प्राप्त करने हेतु ऋषि पञ्चमी व्रत का सुझाव दिया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं ऋषि पंचमी पर देवी -देवता नहीं बल्कि ऋषियों की पूजा ही क्यों होती है.

ऋषि पंचमी पर देवी-देवताओं के बजाय ऋषियों की पूजा क्यों?

हिंदू दर्शन में देवता और ऋषि की भूमिका अलग मानी गई है. देवता प्रकृति और दैवी शक्तियों के अधिष्ठाता माने जाते हैं, जबकि ऋषि वह हैं जिन्होंने तप, साधना और ज्ञान के माध्यम से धर्म तथा वेदों की परंपरा को मनुष्यों तक पहुंचाया. इसलिए ऋषि पंचमी का केंद्र ईश्वर से वर मांगना नहीं, बल्कि ज्ञान देने वाली ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता और अपने दोषों के लिए प्रायश्चित करना है.

धार्मिक परंपरा में इसे ऋषि-ऋण से भी जोड़ा जाता है. मनुष्य पर देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण की अवधारणा मिलती है. ऋषियों ने वेद, धर्म, संस्कार और जीवन के नियमों का ज्ञान आगे बढ़ाया, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना ऋषि-ऋण की स्मृति माना जाता है.

ऋषि पंचमी की तारीख में कंफ्यूजन क्यों

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर 2026 को सुबह 7.44 पर शुरू होकर 16 सितंबर को सुबह 8.59 तक रहेगी. ऋषि पंचमी की पूजा दोपहर में जब पंचमी तिथि विद्यमान हो तब होती है. ऐसे में इस दिन 15 सितंबर को सुबह 11.02 से दोपहर 12.30 तक मुहूर्त रहेगा.

FAQ

जवाब: यह व्रत ऋषि-ऋण, ज्ञान परंपरा और प्रायश्चित से जुड़ा है, इसलिए सप्तर्षियों की पूजा मुख्य होती है.

जवाब: शास्त्रीय परंपरा में पंचमी तिथि में दोपहर के समय सप्तर्षि पूजन का विधान बताया गया है.

जवाब: परंपरागत रूप से यह व्रत महिलाओं से अधिक जुड़ा है, लेकिन इसका मूल भाव ऋषियों के प्रति श्रद्धा और शुद्धि का है.

जवाब: सप्तर्षियों की पूजा के साथ अरुंधती का स्मरण दांपत्य निष्ठा, तप और आदर्श जीवन के प्रतीक के रूप में किया जाता है.

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