शास्त्रोंˈ के अनुसार, गर्भवती महिला को नहीं देखना चाहिए मरे व्यक्ति का चेहरा, जानें क्योंˌ
Himachali Khabar Hindi February 04, 2026 06:43 PM

हिन्दू धर्म में हर एक क्रिया का अपना एक अलग ही महत्व होता है इसी क्रिया में जब कोई स्त्री गर्भ धारण करती है तो  बच्चे का जन्म को एक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।जितना ये छण  सामाजिक तौर पर अहम होता है उतना ही पारिवारिक दृष्टिकोण से घर में संतान का आगमन भी काफी महत्व रखता है शिशु का जन्म हर माता-पिता को एक नया जीवन देता है और परिवार के नाम को आगे बढ़ाता है।

घर के बड़े-बुजुर्गों के लिए यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण और सुखदायी होता है क्योंकि यही इस बात का परिचायक है कि उनका वंश अब आगे बढ़ रहा है। इसीलिए हमारे शास्त्रों में आने वाले शिशु और महिला दोनों ठीक रहे इसके लिए अनेक नियम बनाए गए । लेकिन आजकल की मॉडर्न जनरेशन  इसे दकियानूसी या अन्धविश्वास मानते है लेकिन आज हम आपको बताएँगे की ये सारी मान्यताये अंधविश्वास नहीं है बल्कि इसके पीछे कई अहम वैज्ञानिक कारण है जिनके वजह से गर्भवती महिलाओ को मृत व्यक्ति के पास जाने नहीं दिया जाता है|

जिस घर में किसी की  मृत्यु होती है उस घर में  पूरा माहौल शोकाकुल होता है और  बहुत नेगेटिव भी होता  है। वातावरण में फैली इस  नकारात्मकता का सीधा असर बच्चे के ऊपर भी पड़ता है।क्योंकि  गर्भ में पल रहा बच्चा बहुत संवेदनशील होता है, बाहरी दुनिया में क्या चल रहा है… इस बात से वे ज्यादा प्रभावित होता है|जो उसके लिए हानिकारक साबित हो सकता है |

दूसरा कारण यह है कि जिस घर में मृत्यु होती है या शव रखा होता है जिसमे  बहुत से बैक्टीरिया मौजूद होते हैं। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। और गर्भवती स्त्री के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, जिस वजह से वह बैक्टीरिया उसे या उसके गर्भ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए गर्भवती स्त्री को ऐसी किसी भी जगह पर जाना वर्जित कर दिया जाता है |

यदि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाये तो महिला का मन बहुत कोमल होता है और वह दूसरे को देखकर अधिक व्याकुल हो जाती है, गर्भावस्था में वह भावनात्मक रूप से अधिक कमजोर महसूस करती है । ऐसी अवस्था में शोकाकुल परिवार में जाने से वह तनाव में आ सकती है जिसका विपरीत प्रभाव उसके शिशु पर हो सकता है ।

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