अंबानी का ये रोबोट देगा चीन को मात, 953 करोड़ से ऐसे बनेगी बात
TV9 Bharatvarsh June 10, 2026 05:43 PM

रोबोटिक्स के मैदान में अब भारत चीन को टक्कर देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए एशिया के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी सामने आ गए हैं. वास्तव में मुकेश अंबानी के सपोर्ट चल रही भारतीय स्टार्टअप Addverb Technologies Ltd. 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा फंड जुटाने की कोशिश कर रही है, ताकि देश में रोबोट बनाने वाली टॉप कंपनी के तौर पर अपनी जगह पक्की कर सके.

Addverb के CEO संगीत कुमार ने बताया कि कंपनी के रोबोट लॉजिस्टिक्स फर्म वेयरहाउस और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में सॉर्टिंग, सामान लाने-ले जाने और दूसरे काम करते हैं. अमेरिका, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाज़ारों में विस्तार करने के बाद कंपनी अब और ज़्यादा कैपिटल जुटाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि स्टार्टअप नई टेक्नोलॉजी में निवेश कर रहा है क्योंकि वह ह्यूमनॉइड रोबोट जैसे सेक्टर्स में ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है और कुछ सालों में स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा है.

रिलायंस इंडस्ट्रीज का मिला साथ

इस स्टार्टअप को चीन, जापान और अमेरिका जैसे देशों की बहुत बड़ी कंपनियों से टक्कर मिल रही है, फिर भी कुमार को भरोसा है कि तेजी से बढ़ रही इस इंडस्ट्री में एक भारतीय कंपनी के लिए भी जगह है. अरबपति मुकेश अंबानी की Reliance Industries Ltd. का साथ मिलने के बाद, Addverb ने कई भारतीय कंपनियों को अपना कस्टमर बनाया है और अब वह और आगे बढ़ने की सोच रही है. 46 साल के कुमार ने नई दिल्ली के बाहरी इलाके में Addverb की दो फैक्टरियों में से एक में इंटरव्यू के दौरान कहा कि हम अगले 5 सालों में टॉप 10 और अगले 10 सालों में टॉप 5 में आना चाहते हैं. कंपनी का अनुमान है कि रेवेन्यू के हिसाब से रोबोटिक्स मार्केट शेयर में वह अभी ग्लोबल टॉप 30 से ठीक बाहर है.

रिलायंस के कंट्रोलिंग पॉवर

यह फंड जुटाने की कोशिश 2021 के बाद Addverb की पहली बड़ी कोशिश है, जब उसने Reliance से 132 मिलियन डॉलर जुटाए थे. रिलायंस के पास अब कंपनी में कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है. फाउंडर्स और कर्मचारियों के पास कंपनी का लगभग पांचवां हिस्सा है. कंपनी इस नए कैपिटल का इस्तेमाल मुख्य रूप से ह्यूमनॉइड और क्वाड्रुपेड (चार पैरों वाले) रोबोट जैसे प्रोडक्ट बनाने, डेटा इकट्ठा करने और एडवांस्ड मशीनों को ट्रेन करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम बनाने में करेगी. कंपनी ह्यूमनॉइड में ग्रोथ का बड़ा मौका देख रही है. यह तेज़ी से उभरता हुआ बाज़ार है जहां Unitree Robotics से लेकर Tesla Inc. के Optimus तक की कंपनियां लीडरशिप के लिए होड़ कर रही हैं. कुमार का मानना ​​है कि चीनी कंपनियों को मिली शुरुआती बढ़त और सरकारी सब्सिडी जैसे फायदों के बावजूद भारतीय कंपनियां भी मजबूत कॉम्पिटिशन दे सकती हैं.

चार इं​जीनियर्स ने की थी कंपनी की शुरुआत

कुमार ने कहा कि कॉम्पिटिशन में आगे रहने का एक तरीका अपनी टेक्नोलॉजी विकसित करना और इम्पोर्टेड पार्ट्स पर निर्भरता कम करना है. Addverb दो साल से ज़्यादा समय तक डेवलपमेंट के बाद जल्द ही लिडार सेंसर लॉन्च करने की योजना बना रही है. इससे विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. Addverb की शुरुआत 2016 में चार इंजीनियरों ने एक वेयरहाउस ऑटोमेशन कंपनी के तौर पर की थी. ये सभी पहले भारत की सबसे बड़ी पेंट कंपनी, एशियन पेंट्स लिमिटेड में काम करते थे. कंपनी का एसेट-हैवी मॉडल वेंचर फंड्स को प्रभावित नहीं कर पाया, लेकिन एशियन पेंट्स के एक बैकर ने उनकी कंपनी में निवेश किया.

विदेशों में 1,100 लोगों को देती है रोजगार

तब से कंपनी ने फैक्ट्री ऑटोमेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, डिफेंस और रिसर्च के कामों के लिए रोबोट बनाने के क्षेत्र में अपना विस्तार किया है. इसके ग्राहकों में Lenskart Solutions Ltd., Hindustan Unilever Ltd. और Reliance जैसी रिटेल और कंज्यूमर गुड्स कंपनियां शामिल हैं. Addverb अपनी कुल कमाई का आधा हिस्सा भारत के बाहर से हासिल करती है और दो दर्जन से ज्यादा देशों में लगभग 1,100 लोगों को रोजगार देती है. कुमार ने बताया कि पिछले दो सालों में इंटरनेशनल विस्तार के दौरान नुकसान उठाने के बाद, Addverb मार्च 2027 तक खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर में एडजस्टेड आधार पर मुनाफे में आ जाएगी. उन्हें अगले साल नेट प्रॉफिट की उम्मीद है.

आईपीओ लाने का कोई इरादा नहीं

कुमार ने कहा कि इस फाइनेंशियल ईयर में रेवेन्यू 13 अरब रुपए (136 मिलियन डॉलर) तक पहुंच जाएगा, जिसमें लगभग 200 मिलियन डॉलर के ऑर्डर बुक का योगदान होगा. उन्होंने कहा कि Addverb के लिए अपना दायरा बढ़ाने के लिए IPO (इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग) एक अहम विकल्प है, हालांकि अभी ऐसा करने की कोई तुरंत योजना नहीं है. कुमार ने कहा कि इस स्टेज पर, हमें लगता है कि हम IPO लाने के लिए बहुत छोटे हैं. शायद जब हमारा रेवेन्यू 40 अरब या 50 अरब रुपए से ज्यादा हो जाएगा, तब हम IPO के बारे में सोचेंगे. कुमार ने कहा कि अगर कंपनी मौजूदा रफ़्तार से बढ़ती रही, तो सेल्स का यह माइलस्टोन अगले दो सालों में ही हासिल किया जा सकता है.

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