बेजुबानों पर काल बनकर टूटी लखनऊ हादसे की आग, इंसानों ने बचाईं बिल्‍लियां, कई डॉग्‍स का नहीं चल रहा पता
Webdunia Hindi June 23, 2026 10:43 PM


लखनऊ की एक इमारत में आग लगी थी। चारों तरफ़ अफ़रा-तफ़री मची थी। लेकिन धुएं के बीच, लोगों का एक समूह बस एक ही सवाल पूछ रहा था... ‘अंदर फंसे जानवरों का क्या होगा?’ लखनऊ के अलीगंज में लगी भीषण आग में 15 लोगों की जान चली गई, लेकिन इसी त्रासदी के बीच एक और बचाव अभियान भी चल रहा था।

स्थानीय लोग, जानवरों की भलाई के लिए काम करने वाले वॉलंटियर, पशु चिकित्सक, फ़ायरफ़ाइटर और पुलिस अधिकारी एक मकसद के साथ एकजुट हो गए। वो मकसद था एक पेट फ़ैसिलिटी (पालतू जानवरों की जगह) में फंसे बेज़ुबान जानवरों की जान बचाना।

जब फ़ायरफ़ाइटर आग बुझाने में जुटे थे, तो वॉलंटियर बैरिकेड के पीछे बेचैनी से इंतज़ार कर रहे थे, ताकि जैसे ही कोई जानवर बाहर आए, वे मदद कर सकें।

कुछ लोगों ने ग्राउंड फ़्लोर से कुत्तों और पिल्लों को सुरक्षित बाहर निकाला। इलाज के लिए तुरंत पशु चिकित्सा टीमों को तैनात किया गया। जानवरों को बचाने वालों ने उनके ट्रांसपोर्ट और रहने की जगह का इंतज़ाम किया। कुछ घंटों बाद, बचाव दल को बेसमेंट में कई बिल्लियां ज़िंदा मिलीं और उन्हें सावधानी से मेडिकल केयर के लिए बाहर निकाला गया। सबकी मिली-जुली कोशिशों से जलती हुई इमारत से 30 से ज़्यादा जानवरों की जान बचाई जा सकी।

एक ऐसी त्रासदी में जिसने इतना कुछ छीन लिया, अलग-अलग तरह के लोगों ने उन बेज़ुबान जीवों के लिए एक साथ खड़े होने का फ़ैसला किया जो खुद मदद नहीं मांग सकते थे। कभी-कभी, इंसानियत को इस बात से नहीं मापा जाता कि हम सबसे पहले किसे बचाते हैं, बल्कि इस बात से मापा जाता है कि हम किसे पीछे छोड़ने से इनकार करते हैं।

अलीगंज इलाके में सोमवार को उस समय दिल दहला देने वाला मंजर देखने को मिला, जब एक पेट्स शॉप और क्लिनिक में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर से उठती आग की लपटों और काले धुएं ने वहां भर्ती कई बेजुबानों की जिंदगी को संकट में डाल दिया।

यह सिर्फ एक इमारत में लगी आग नहीं थी, बल्कि उन दर्जनों पेटस पैरंट्स की सांसें अटक जाने का मंजर भी था, जिन्होंने अपने बीमार पालतू जानवरों को इलाज के लिए यहां भर्ती करवाया हुआ था। हादसे की खबर मिलते ही दमकल विभाग, SDRF और स्थानीय पेट वॉलेंटियर्स मुस्तैदी से रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए।

10 बिल्लियां सुरक्षित , डॉग्स का पता नहीं : टीम ने सूझबूझ से करीब 10 बिल्लियों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन अपने डॉग्स की सही सलामत वापसी की आस में बाहर खड़े मालिकों का रो-रोकर बुरा हाल था। सोशल मीडिया पर खबर देख पहुंचे ओनर्स जैसे ही आग की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, पेट्स ओनर्स का कलेजा मुंह को आ गया और लोग क्लिनिक की तरफ दौड़ पड़े। शिल्पा ने बताया कि दो दिन पहले ही मैंने अपने डॉग को एडमिट करवाया था। दोपहर करीब 3 बजे सोशल मीडिया से मुझे आग लगने की जानकारी मिली। रेस्क्यू टीम सेकंड फ्लोर से जानवरों को निकाल तो रही थी, लेकिन मेरे डॉग के बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा है। पता नहीं वो जिंदा है भी या नहीं। शिल्पा की तरह ही कई अन्य लोग भी हाथों में अपने पालतू जानवरों की तस्वीरें लिए रेस्क्यू टीम के सामने मिन्नतें करते दिखे।

आसरा हेल्पिंग हैंड एनजीओ की वॉलंटियर चारू ने बताया कि इस क्लिनिक में पालतू जानवरों के अलावा स्ट्रे डॉग्स और कैट्स का भी मुफ्त या बहुत ही किफायती दरों पर इलाज किया जाता था, जिसके कारण यहां हमेशा काफी संख्या में जानवर भर्ती रहते थे। फिलहाल, रेस्क्यू की गई बिल्लियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर उनका इलाज शुरू कर दिया गया है। वहीं, दमकल और SDRF की टीमें मलबे और धुएं के बीच अन्य बेजुबानों की तलाश में जुटी रहीं।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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