Vat Purnima Vrat 2026: 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत, नोट कर लें रोली, सूत से लेकर फल-मिठाई तक की पूरी लिस्ट
TV9 Bharatvarsh June 24, 2026 06:43 PM

Vat Purnima Vrat Puja Samagri: हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को यह पावन व्रत रखने का विधान है. मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में इस व्रत को बेहद श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. साल 2026 में वट पूर्णिमा का व्रत 29 जून को रखा जाएगा. किसी भी पूजा की सफलता उसकी सही सामग्री और विधि से होती है. अगर आप भी इस साल यह व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों की लिस्ट अभी से नोट कर लें.

वट पूर्णिमा व्रत 2026 तिथि?

द्रिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि 29 जून 2026 को सुबह 3 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और 30 जून 2026 को सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर वट पूर्णिमा व्रत 29 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं विधि-विधान से व्रत रखकर बरगद के पेड़ की पूजा करेंगी.

वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व

वट पूर्णिमा व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की कथा से जुड़ा हुआ है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावित्री ने अपने तप, निष्ठा और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांगे थे. तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है. बरगद के पेड़ को दीर्घायु का प्रतीक माना गया है.

वट पूर्णिमा पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
  • रोली या कुमकुम
  • हल्दी
  • अक्षत (चावल)
  • मौली या पूजा का सूत
  • जल से भरा कलश
  • गंगाजल
  • फूल और फूलों की माला
  • धूप और दीपक
  • कपूर
  • नारियल
  • पान के पत्ते
  • सुपारी
  • मौसमी फल
  • मिठाई
  • अगरबत्ती
  • लाल या पीला कपड़ा
  • सावित्री-सत्यवान की तस्वीर या प्रतिमा
  • पूजा की थाली
  • वट वृक्ष पर लपेटने के लिए कच्चा सूत
वट पूर्णिमा की पूजा विधि

वट पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. पूजा की सभी सामग्री एकत्र कर वट वृक्ष के पास जाएं. बरगद के पेड़ को जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, फूल तथा अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. इसके बाद वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें. कई स्थानों पर सात या 108 बार परिक्रमा करने की परंपरा भी है. पूजा के दौरान सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी का स्मरण करना शुभ माना जाता है.

क्यों खास माना जाता है बरगद का वृक्ष?

धार्मिक मान्यताओं में बरगद के वृक्ष को त्रिदेवों का स्वरूप माना गया है. कहा जाता है कि इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है. यही कारण है कि वट पूर्णिमा के दिन इसकी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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