खतरे की घंटी या बंपर डिमांड की तैयारी! त्योहारी सीजन से ठीक पहले भारतीय कंपनियों ने क्यों जमा किया रिकॉर्ड स्टॉक?
TV9 Bharatvarsh July 16, 2026 11:43 AM

आगामी त्योहारी सीजन (Festive Season) के शुरू होने से पहले भारतीय कॉर्पोरेट जगत (India Inc) एक बड़े असमंजस और संभावित चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है. वैश्विक मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितताओं, लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) के संकट और त्योहारों पर होने वाली भारी मांग को देखते हुए देश की प्रमुख कंपनियों ने अभी से कच्चे माल और तैयार उत्पादों का भारी स्टॉक जमा (Stockpiling) करना शुरू कर दिया है. कंपनियां किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहतीं और संकट आने से पहले ही अपने गोदामों को फुल करने में जुट गई हैं. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारतीय कंपनियों को किस बात का डर है और वे क्या रणनीति अपना रही हैं.

‘वॉर-रूम मोड’ में कंपनियां

वेस्ट एशिया में संकट के फिर से बढ़ने और रुपए के कमजोर होने से कंज्यूमर गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनियों को त्योहारों के मौसम से पहले सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए ‘वॉर-रूम मोड’ में आ गई हैं. कंपनियां चीन से शिपमेंट जल्दी मंगवा रही हैं और प्रोडक्शन में रुकावट को कम करने के लिए इंपोर्ट किए गए पार्ट्स और रॉ मटीरियल (पेट्रोकेमिकल-बेस्ड पैकेजिंग मटीरियल सहित) का बफर स्टॉक 20 फीसदी तक बढ़ा रही हैं.

ईटी की रिपोर्ट में एग्जीक्यूटिव्स के हवाले से कहा कि यह नया तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब फैक्ट्रियों ने त्योहारों के मौसम के लिए प्रोडक्शन बढ़ाना शुरू ही किया था. त्योहारों का मौसम केरल में ओणम और महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी से शुरू होता है, और मुख्य सीजन अक्टूबर में नवरात्रि से नवंबर में दिवाली तक चलता है. इस सीजन को भारत में सबसे ज्यादा खरीदारी का समय माना जाता है, जो कई कैटेगरी में सालाना सेल्स का 30 फीसदी तक हिस्सा होता है.

कंपनियां कर रही ये प्लानिंग

वेस्ट एशिया में नए तनाव के बीच कंज्यूमर कंपनियां त्योहारों के मौसम से पहले शिपमेंट जल्दी मंगवा रही हैं और इंपोर्ट किए गए कंपोनेंट्स और रॉ मटीरियल का स्टॉक जमा कर रही हैं. बिस्किट बनाने वाली कंपनी पार्ले प्रोडक्ट्स के वाइस प्रेसिडेंट मयंक शाह ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि हम स्थिति पर नजर रख रहे हैं, लेकिन हमने प्लास्टिक पैकेजिंग मटीरियल का 10-15 फीसदी ज्यादा बफर ऑर्डर किया है और तैयार माल का 8-10 फीसदी अतिरिक्त बफर बना रहे हैं, ताकि अगर LPG या अन्य कारणों से प्रोडक्शन में रुकावट आए तो स्टॉक खत्म न हो.

फरवरी में US-ईरान तनाव के कारण शुरू हुए वेस्ट एशिया संकट ने सप्लाई चेन को बाधित किया, इंडस्ट्रियल LPG की कमी पैदा की, पेट्रोकेमिकल-बेस्ड रॉ मटीरियल और फ्रेट (माल ढुलाई) की कीमतें बढ़ाईं, और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण शिपमेंट में देरी की. जून के मिड में संघर्ष-विराम (सीजफायर) से कुछ समय के लिए दबाव कम हुआ था, और नए तनाव से पहले कच्चे तेल, प्लास्टिक पैकेजिंग और फ्रेट दरों में नरमी आई थी.

कॉम्प्लान और ग्लूकोन-डी बेचने वाली कंपनी जायडस वेलनेस के चीफ एग्जीक्यूटिव तरुण अरोड़ा ने कहा कि कंपनी प्लास्टिक की 1-2 महीने की अतिरिक्त इन्वेंट्री बनाएगी. उन्होंने कहा कि तनाव का नया दौर पूरी तरह से अप्रत्याशित था. प्लास्टिक की कीमतें स्थिर होने लगी थीं, लेकिन अचानक बढ़े तनाव ने कीमतों को फिर से बढ़ा दिया है.

बढ़ गया ट्रांजिट टाइम

US और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और स्ट्रेट के बंद होने के बाद, शिपिंग कंपनियों ने लंबे ट्रांजिट टाइम की चेतावनी दी है, जबकि कच्चे तेल की कीमतें चार हफ्तों के हाइएस्ट लेवल पर पहुंच गईं और रुपया US डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे कमजोर हो गया. इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि चीन से सामान मंगाने वाली भारतीय कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.

इस स्ट्रेट में रुकावटों की वजह से अक्सर दूसरे बंदरगाहों पर भीड़ लग जाती है, जिससे जहाजों के शेड्यूल में देरी होती है और डिलीवरी में ज्यादा समय लगता है. भारत आने वाले कई जहाज सामान उतारने के बाद मिडिल ईस्ट या यूरोप के बंदरगाहों के लिए आगे बढ़ जाते हैं.

सुपर प्लास्ट्रोनिक्स, जो Blaupunkt, Kodak और Thomson ब्रांड के तहत टेलीविजन बनाती और बेचती है, को सोमवार को चीन के शेन्जेन पोर्ट से 11 मई को भेजा गया कंपोनेंट्स का एक कंसाइनमेंट मिला. भीड़ के कारण, जहाज अपने सामान्य रास्ते के बजाय कराची की ओर मोड़ दिया गया और फिर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर लौटा, जिससे यात्रा का समय सामान्य 22-30 दिनों से कहीं ज्यादा हो गया.

कंपनी को डर है कि संकट के और बढ़ने से शिपिंग के समय में और देरी होगी. सुपर प्लास्ट्रोनिक्स के चीफ एग्जीक्यूटिव अवनीत सिंह मारवाह ने कहा कि एहतियात के तौर पर, हमने अपने कंपोनेंट सप्लायर्स से तुरंत 15-20 फीसदी अतिरिक्त स्टॉक भेजने को कहा है. हालात बहुत अस्त-व्यस्त हो गए हैं, इसलिए त्योहारों के मौसम में कमी से बचने के लिए पहले से योजना बनाना जरूरी है.

ऐसा भी कर रही हैं कंपनियां

इलेक्ट्रॉनिक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर PG Electroplast, जो LG, Voltas, Whirlpool और Daikin समेत 60 से ज्यादा ब्रांड्स के लिए कंपोनेंट्स बनाती है, भी त्योहारों के मौसम में प्रोडक्शन के लिए पर्याप्त इन्वेंट्री सुनिश्चित करने के लिए चीन से शिपमेंट जल्दी मंगा रही है. गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप में अप्लायंसेज के बिजनेस हेड कमल नंदी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि लंबे समय तक रुकावट का असर कई स्तरों पर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि इंपोर्ट किए जाने वाले कंपोनेंट्स के ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं. त्योहारों के समय प्रोडक्शन पूरी क्षमता से चल रहा है, इसलिए सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट से प्रोडक्शन और इन्वेंट्री की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. कुछ कंपनियां कच्चे माल और तैयार माल की ज़्यादा इन्वेंट्री रखने के लिए अतिरिक्त वेयरहाउस स्पेस भी किराए पर ले रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी.

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