फेसबुक-यूट्यूब से इंस्टाग्राम तक नजर… बिहार में सोशल मीडिया पर अपशब्द लिखे तो लगेगा CCA, जानिए नए नियम
TV9 Bharatvarsh July 21, 2026 07:43 PM

Bihar CCA 2024 amendment: बिहार सरकार ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग, अफवाहों, फर्जी खबरों, अभद्र भाषा और धमकी भरे पोस्ट पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. राज्य मंत्रिमंडल ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA), 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही राज्य के सभी जिलों में ‘जिला स्तरीय मीडिया मॉनिटरिंग-सह-मीडिया प्रबंधन कोषांग’ का गठन किया गया है. अब सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी.

मुख्य सचिव की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले में गठित मीडिया मॉनिटरिंग कोषांग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर रखेगा. यह टीम समाचार पत्रों, न्यूज पोर्टल, टीवी चैनल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर प्रकाशित सामग्री की निगरानी करेगी.

अगर किसी पोस्ट, वीडियो, रील या खबर में गलत, भ्रामक या तथ्यहीन जानकारी पाई जाती है तो संबंधित विभागों से जानकारी लेकर उसका खंडन कराया जाएगा. वहीं अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान कर पोस्ट हटाने, प्रोफाइल बंद कराने और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में बनेगी जिला कमेटी

सरकार के आदेश के मुताबिक, जिला स्तर पर बनने वाली इस कमेटी की अध्यक्षता अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था) करेंगे. इसमें पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), पुलिस उपाधीक्षक (साइबर), सहायक आपदा प्रबंधन पदाधिकारी और जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी सदस्य होंगे.

जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी को इस कोषांग का नोडल अधिकारी बनाया गया है. इस टीम की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर चल रही सामग्री की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की होगी.

भड़काऊ पोस्ट पर CCA के तहत कार्रवाई संभव

इस नए प्रावधान में सबसे अहम बदलाव यह है कि यदि किसी व्यक्ति की सोशल मीडिया गतिविधि से समाज में तनाव फैलने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होती है तो उसके खिलाफ बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

जिलाधिकारी को ऐसे मामलों में कार्रवाई का अधिकार दिया गया है. इसके तहत संबंधित व्यक्ति को तीन महीने तक निरुद्ध किया जा सकता है. इसके अलावा जिला बदर करने या नियमित रूप से थाने में हाजिरी लगाने का आदेश भी दिया जा सकता है.

पहले BNS और IT एक्ट के तहत होती थी कार्रवाई

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट, धमकी या अभद्र भाषा के मामलों में पहले पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और अन्य साइबर कानूनों के तहत कार्रवाई करती थी.

पूर्णिया के अधिवक्ता आशुतोष कुमार झा ने बताया कि किसी भी मामले में अंतिम फैसला अदालत द्वारा लागू कानूनों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है. उन्होंने कहा कि कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है.

कानूनी विशेषज्ञों ने निष्पक्ष इस्तेमाल की दी सलाह

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ते अपराध, फेक न्यूज और अफवाहों को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था जरूरी है. हालांकि, इसका इस्तेमाल संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वैध आलोचना या असहमति को अपराध की श्रेणी में न रखा जाए.

पूर्णिया प्रेस क्लब के अध्यक्ष मिथलेश कुमार सिंह ने सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव, व्यक्तिगत दुश्मनी या दुर्भावना के लिए नहीं होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पत्रकारों और आम नागरिकों को जनहित के मुद्दे उठाने और तथ्यों के आधार पर सवाल पूछने की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए. लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता बेहद महत्वपूर्ण है. किसी भी विवाद की स्थिति में न्यायपालिका के माध्यम से समाधान का रास्ता खुला है.

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