दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च: अभिजीत दीपके के माता-पिता ने किया समर्थन
newzfatafat July 22, 2026 03:42 AM

दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता ने उनके आंदोलन का समर्थन किया है। अभिजीत के पिता, भगवान दीपके ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की सुरक्षा की चिंता है, लेकिन वे उसे आंदोलन समाप्त करने के लिए नहीं कहेंगे। उनका मानना है कि अभिजीत ने यह आंदोलन अपनी सोच और जिम्मेदारी के साथ शुरू किया है, इसलिए परिवार उस पर पीछे हटने का दबाव नहीं डालेगा। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।


मां का सवाल: छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?

अभिजीत की मां, अनीता दीपके ने भी पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि 18 से 20 वर्ष के छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। अनीता ने बताया कि ये युवा पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से अपने भविष्य के लिए प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। जब उन्होंने मोबाइल पर कार्रवाई के वीडियो देखे, तो उनकी आंखें नम हो गईं। उनके अनुसार, सरकार को बल प्रयोग करने के बजाय छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था।


पिता ने सरकार पर अहंकार का आरोप लगाया

भगवान दीपके, जो महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) से सेवानिवृत्त इंजीनियर हैं, ने कहा कि सोमवार की घटना सरकार के अहंकारी रवैये को दर्शाती है। उनके अनुसार, प्रदर्शन में शामिल छात्र शिक्षित थे और उन्होंने हिंसा या उपद्रव का रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई ने हालात को बिगाड़ दिया और शांतिपूर्ण आंदोलन को टकराव की स्थिति में पहुंचा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने से सरकार में जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ जाती है।


पुलिस का दावा: प्रदर्शन हुआ हिंसक

दिल्ली पुलिस ने इस घटनाक्रम पर एक अलग दृष्टिकोण पेश किया है। पुलिस के अनुसार, 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी आक्रामक हो गए, सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया। पुलिस का दावा है कि इस झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। बयान के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने और निषेधाज्ञा की जानकारी देने के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे। इसी कारण भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जहां एक पक्ष इसे छात्रों के अधिकारों पर चोट बता रहा है, वहीं पुलिस अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बता रही है।


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