जब देश में भारत विरोधी ताकतें छात्र प्रदर्शनों और अन्य मुद्दों के माध्यम से अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर रही हैं, तब उत्तर प्रदेश की भारत-नेपाल सीमा पर हुई एक घटना कई गंभीर सवाल उठाती है। सुरक्षा एजेंसियों ने न केवल अवैध घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को विफल किया, बल्कि खालिस्तान समर्थक संगठन 'वारिस पंजाब दे' से जुड़े दो सक्रिय सदस्यों को भी गिरफ्तार किया। इनमें एक अमेरिकी नागरिक शामिल है, जो यह दर्शाता है कि भारत विरोधी नेटवर्क अब अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और सीमापार रास्तों का उपयोग कर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और उत्तर प्रदेश पुलिस के संयुक्त अभियान में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 'वारिस पंजाब दे' के सदस्य विक्रमजीत सिंह और अमेरिकी नागरिक मनबीर सिंह ढिल्लों शामिल हैं। इसके अलावा, तीन भारतीय सहयोगी राहुल कुमार, सुरेश कुमार पाठक और दिलीप पाठक भी गिरफ्तार किए गए। जांच एजेंसियों के अनुसार, ये भारतीय आरोपी दोनों संदिग्धों को अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की साजिश में शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई की शाम को खुफिया सूचना के आधार पर रुपईडीहा स्थित बीआईटी चेक पोस्ट पर एक संयुक्त जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान एक इनोवा कार को रोका गया, जिसमें विक्रमजीत सिंह को नेपालगंज से पीलीभीत लाया जा रहा था। उसकी गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए पूछताछ की गई। उसी रात, अमेरिकी नागरिक मनबीर सिंह ढिल्लों को भी सीमा स्तंभ संख्या 651/5 के पास भारतीय सीमा में लगभग 40 मीटर भीतर पकड़ा गया।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों की पहचान की गई। विक्रमजीत सिंह पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर का निवासी है और वह पंजाब पुलिस को लंबे समय से वांछित था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, अपहरण और लूट जैसे गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, मनबीर सिंह ढिल्लों मूल रूप से पंजाब के मोगा जिले का निवासी है और उसके खिलाफ भी आपराधिक साजिश और वैमनस्य फैलाने के आरोप हैं।
जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कई चौंकाने वाले सबूत मिले। विक्रमजीत सिंह के पास से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए गए। वहीं, मनबीर सिंह ढिल्लों के पास अमेरिकी पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक कार्ड और लगभग 900 अमेरिकी डॉलर बरामद हुए।
बहराइच पुलिस ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आव्रजन नियमों के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब पंजाब पुलिस के साथ मिलकर दोनों मुख्य आरोपियों की आपराधिक गतिविधियों और उनके नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है।
'वारिस पंजाब दे' संगठन की स्थापना 2021 में दिवंगत दीप सिद्धू ने की थी। यह संगठन समय के साथ पंजाब की धार्मिक-राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो गया है और कई विवादों का केंद्र रहा है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में एक व्यक्ति, जिसने खुद को अमेरिका का निवासी बताया, बिना वैध दस्तावेजों के नेपाल जाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। ऐसी घटनाएं भारत-नेपाल खुली सीमा के दुरुपयोग की आशंका को और बढ़ाती हैं।
बहराइच में हुई यह कार्रवाई केवल दो वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह संकेत देती है कि भारत विरोधी और अलगाववादी तत्व अब अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और फर्जी पहचान पत्रों का सहारा लेकर घुसपैठ की नई रणनीति अपना रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने एक संभावित बड़ी साजिश को विफल कर दिया है।