हमारे देश में कई लोग ऐसे हैं जो की ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ा देते हैं. आपके अक्सर सोशल मीडिया पर वीडियो देखा होगा कि, लोग कैसे नियमों का पालन नहीं करते हैं और उसके बाद बढे शौक से उसका वीडियो भी बना लेते हैं. जो की सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता है. इस बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ है.
जिसमें महिंद्रा थार को फुटपाथ पर चढ़ा कर चलाया जा रहा है. वीडियो के इंटरनेट पर वायरल होते ही लोगों ने चालक की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर गुस्सा जताया और ट्रैफिक पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या फुटपाथ पर गाड़ी चलाना गैर-कानूनी है और ऐसा करने पर कितना भारी चालान कट सकता है. चलिए जानतें हैं इस खबर में विस्तार से.
बता दें कि, भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार सड़कें वाहनों की आवाजाही के लिए होती हैं जबकि फुटपाथ और पेडेस्ट्रियन ट्रैक केवल पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं. किसी भी चार पहिया या दो पहिया वाहन को फुटपाथ पर चढ़ाना पूरी तरह से गैर-कानूनी और ट्रैफिक नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है.
ऐसा करने से न केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य चालकों के लिए भी डर और दुर्घटना की स्थिति पैदा होती है. कानून के तहत फुटपाथ पर वाहन चलाना या पार्किंग करना अपराध की श्रेणी में आता है.

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वहीं, अगर कोई चालक अपनी कार या बाइक को फुटपाथ पर चढ़ाकर चलाता है तो ट्रैफिक पुलिस उसके खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 184 और धारा 177A के तहत कार्रवाई कर सकती है. इसके तहत पहली बार अपराध करने पर चालक पर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का भारी ई-चालान या कोर्ट चालान जारी किया जा सकता है.
जबकि इसके अलावा यदि इस कार्य से किसी की जान को खतरा पैदा होता है या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो चालक को 6 महीने से 1 साल तक की जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है.

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बता दें कि, फुटपाथ पर गाड़ी चढ़ाने का मामला केवल जुर्माने तक ही सीमित नहीं रहता है. अगर पुलिस को लगता है कि चालक ने अन्य लोगों की जान को जानबूझकर जोखिम में डाला है या ट्रैफिक में दहशत फैलाई है तो पुलिस मौके पर ही वाहन को जब्त कर सकती है.
वहीं, इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस संबंधित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को सिफारिश भेजकर चालक का ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने से लेकर हमेशा के लिए निलंबित या रद्द करा सकती है. बार-बार इस तरह की हरकत दोहराने पर सख्त आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर भी दर्ज की जाती है.
वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस थार वाले मामले ने एक बार फिर लोगों के बीच सिविक सेंस और ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता पर बहस छेड़ दी है. ऑफ-रोडिंग गाड़ियों या शक्तिशाली एसयूवी का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि आप उन्हें सार्वजनिक पैदल रास्तों पर चलाएं.
ट्रैफिक जाम में धैर्य बनाए रखना हर जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है. यदि आप भी ट्रैफिक से बचने के लिए फुटपाथ या साइकिल ट्रैक का सहारा लेते हैं, तो यह न केवल आपको भारी आर्थिक चपत लगा सकता है बल्कि आपको सलाखों के पीछे भी भेज सकता है. इसलिए हमेशा तय सड़कों पर ही नियम के मुताबिक गाड़ी चलाएं.
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