क्या होगा अगर विश्व कप के किसी ग्रुप में सभी टीमें अंकों और गोल अंतर में बराबरी पर रहें?
सुनीता शर्मा June 19, 2026 03:24 PM

विश्व कप अब पूरी रफ़्तार में है और टूर्नामेंट की हर टीम अपना पहला मुकाबला खेल चुकी है।

कुछ समूहों में अब तक बेहद रोमांचक मुकाबले देखने को मिले हैं, जबकि कुछ ग्रुपों में उत्साह थोड़ा कम रहा है — खासकर 15 जून को हुए तीन ड्रा मैचों के बाद।

तो सवाल यह उठता है — अगर किसी ग्रुप में सभी टीमें एक समान अंकों और गोल अंतर के साथ समाप्त करें, तो क्या होगा?

हालांकि ऐसा होना बेहद असंभव है, पर असंभव बिल्कुल नहीं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए फीफा ने ऐसी स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट नियम बनाए हैं।

अगर सभी टीमें अंकों, हेड-टू-हेड परिणामों, गोल अंतर और कुल गोलों में बराबरी पर रहती हैं, तो अन्य कारकों को देखा जाता है।

सबसे पहले टीमों के अनुशासन (डिसिप्लिन) रिकॉर्ड की जांच की जाती है — यानी पीले और लाल कार्डों की गिनती। जिन टीमों के पास सबसे कम कार्ड होते हैं, उन्हें आगे बढ़ने का लाभ मिलता है।

अगर टीमों के अनुशासन रिकॉर्ड भी समान हों, तो फीफा की आधिकारिक विश्व रैंकिंग का सहारा लिया जाता है। यही रैंकिंग यह तय करती है कि कौन सी टीम अगले दौर में जाएगी।

उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए ग्रुप बी में सभी चार टीमें समान अंकों, गोल अंतर और कार्डों की संख्या के साथ समाप्त होती हैं। इस स्थिति में फीफा विश्व रैंकिंग यह तय करेगी कि कौन सी टीम नॉकआउट चरण में पहुंचेगी।

इस नियम से स्विट्ज़रलैंड को फायदा मिलेगा, जिसकी मौजूदा विश्व रैंकिंग 19वीं है, जबकि कनाडा 32वें स्थान पर है।

कतर, जो 49वें स्थान पर है, तीसरे स्थान के जरिए आगे बढ़ने की संभावना रख सकता है, लेकिन बोस्निया और हर्ज़ेगोविना के लिए यह खबर अच्छी नहीं होगी, क्योंकि वे 63वें स्थान पर हैं।

इस तरह फीफा का यह नियम सुनिश्चित करता है कि अगर मैदान पर हर चीज बराबर हो जाए, तो अनुशासन और विश्व रैंकिंग जैसे सूक्ष्म कारक निर्णायक बनें।

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